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देशभर में फैला फर्जी जीएसटी पंजीकरण का जाल

Bolta Sach News
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Fake GST spread across the country
बोलता सच ,लखनऊ। जीएसटी पंजीकरण में धांधली कर सरकार को अरबों रुपये का चूना लगाने वाले जालसाजों का देशव्यापी सिंडीकेट अब जीएसटी विभाग की रडार पर है। जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि फर्जी कारोबारियों का यह नेटवर्क 23 राज्यों तक फैला हुआ है, जो बिजली बिल, आधार कार्ड, पैन कार्ड और संपत्ति की रजिस्ट्री जैसे दस्तावेजों में फोटोशॉप से हेराफेरी कर फर्जी पंजीकरण करा रहा है।
लखनऊ में दर्ज एक फर्म के पते से ऐसे कई पंजीकरणों का सुराग मिला है, जिनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेज पूरी तरह से दूसरों के नाम पर पाए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 80 प्रतिशत फर्मों ने दूसरों के दस्तावेजों का उपयोग किया है।

कैसे चलता है फर्जीवाड़े का खेल

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह जालसाजी डेटा चोरी से लेकर टैक्स क्रेडिट तक फैली है। ठग सबसे पहले इंटरनेट या साइबर माध्यमों से बिजली बिल और पहचान पत्रों की स्कैन कॉपियां चोरी करते हैं। इसके बाद फोटोशॉप या अन्य सॉफ्टवेयर से नाम, पता और फोटो बदलकर इन्हें “नए दस्तावेज़” की तरह प्रस्तुत किया जाता है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर नया पंजीकरण कराया जाता है।

सत्यापन से बचने के लिए जालसाज डमी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का उपयोग करते हैं। एक बार पंजीकरण सक्रिय होने के बाद, यह नेटवर्क फर्जी बिलिंग चेन तैयार करता है। एक फर्म से दूसरी फर्म को कागज़ी बिल जारी किया जाता है, जिससे करोड़ों का व्यापार दिखाया जाता है। वास्तविकता में कोई लेनदेन नहीं होता, लेकिन फर्जी इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा किया जाता है।


उत्तर प्रदेश में 1,800 करोड़ की टैक्स चोरी का अनुमान

राज्य कर (SGST) और केंद्रीय कर (CGST) विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पिछले एक वर्ष में 2,500 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ है। इनसे लगभग 1,800 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का अनुमान है। लखनऊ, नोएडा, कानपुर और वाराणसी जैसे औद्योगिक जिलों में ही 700 से ज्यादा फर्में फर्जी निकली हैं।

इन पंजीकरणों में सबसे अधिक फर्जी दस्तावेज पाए गए —

  • बिजली बिल: 60%

  • आधार कार्ड: 55%

  • पैन कार्ड: 50%

  • संपत्ति रजिस्ट्री की फोटोकॉपी: 40%

अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में जालसाजों ने भौतिक सत्यापन के बिना ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर ली थी।


अब होगी कड़ी डिजिटल निगरानी

राज्य कर विभाग ने अब सभी जिलों में डिजिटल वेरीफिकेशन और फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिया है। वहीं जीएसटी नेटवर्क (GSTN) पोर्टल पर भी दस्तावेज अपलोड करते समय फेस ऑथेंटिकेशन और लाइव लोकेशन टैगिंग की नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह अब केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं रहा, बल्कि डेटा सुरक्षा और साइबर अपराध का बड़ा खतरा बन चुका है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट्स और फर्जी दस्तावेज़ आपूर्तिकर्ताओं की पहचान में जुटी हैं।


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