बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। एक बेटे ने कथित तौर पर अपने पिता की रायफल से गोली मारकर हत्या कर दी और बाद में शव के टुकड़े कर उन्हें अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया। धड़ को घर में रखे एक नीले ड्रम में छिपाया गया था। पुलिस ने आरोपी बेटे अक्षत को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया के सामने बोला- “गलती से हो गया”
बुधवार को जब अक्षत को मीडिया के सामने लाया गया तो पत्रकारों ने उससे हत्या की वजह पूछी। इस पर वह कुछ पल चुप रहा और धीमी आवाज में कहा, “गलती से हो गया।” आगे पूछे गए सवालों—जैसे किसी दबाव, परीक्षा तनाव या बहन की भूमिका—पर उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और सिर हिलाकर इनकार करता रहा। नीला ड्रम और एसिड लाने के बारे में भी वह चुप रहा।
20 फरवरी को हुई वारदात
पुलिस के अनुसार, 20 फरवरी की तड़के करीब साढ़े चार बजे अक्षत ने आपसी विवाद के बाद अपने पिता मानवेंद्र सिंह (50) को गोली मार दी। सबूत मिटाने के उद्देश्य से उसने शव के हाथ-पैर काटकर शहर के अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए, जबकि धड़ को घर में रखे एक नीले ड्रम में छिपा दिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
परिवार और पड़ोसियों को नहीं था शक
पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटा ऐसा कदम उठा सकता है। 20 फरवरी के बाद जब परिवार ने मानवेंद्र सिंह के लापता होने की बात कही तो स्थानीय लोग भी उनके साथ पुलिस के पास गए। बताया गया कि अक्षत ने दावा किया था कि उसने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करा दी है।
मानवेंद्र सिंह के भाई ने बताया कि 20 फरवरी की शाम को उन्होंने अपने भाई को फोन किया, लेकिन फोन बंद था। जब उन्होंने अक्षत से पूछा तो उसने कहा कि उसके पिता जरूरी काम से दिल्ली गए हैं और दो दिन में लौटेंगे। लगातार फोन बंद रहने पर उन्हें शक हुआ, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि अक्षत ही इस घटना में शामिल हो सकता है।
आर्थिक रूप से मजबूत था परिवार
परिवार और पड़ोसियों के अनुसार, मानवेंद्र सिंह के चार पैथोलॉजी सेंटर और शराब की तीन दुकानें थीं। परिवार आर्थिक रूप से संपन्न माना जाता था। पुलिस ने आरोपी अक्षत को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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1 thought on “पिता के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने वाले लखनऊ के अक्षत का कबूलनामा”