सहसवान कोतवाली में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, हाजी बिट्टन अली के कार्यालय की बाउंड्री पर कटीले और प्रतिबंधित तार लगाए गए थे, जिनमें बिजली का करंट प्रवाहित किया जा रहा था। आरोप है कि इन्हीं करंट लगे तारों में फंसकर एक बंदर की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद बंदर का शव पूरी रात सहसवान थाने में रखा रहा और अगले दिन उसका पोस्टमार्टम कराया गया।
पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि सहसवान कोतवाली क्षेत्र में स्थित हाजी बिट्टन अली के कार्यालय की चारदीवारी पर जानवरों को रोकने के लिए खतरनाक तरीके से कटीले तार लगाए गए हैं। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि एक बंदर उन तारों में फंसा हुआ है और उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी और मामले में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में कहा गया है कि इस तरह के प्रतिबंधित और करंट युक्त तार न केवल पशुओं बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। पशु प्रेमियों का आरोप है कि यह सीधा-सीधा पशु क्रूरता का मामला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ देखा जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे अमानवीय कृत्य बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कुछ संगठनों ने प्रशासन से ऐसे सभी स्थानों की जांच कराने की अपील की है, जहां इस तरह के करंट लगे तार लगाए गए हों।
पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कार्यालय परिसर में करंट वाले तार किसके आदेश पर लगाए गए थे और क्या इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस घटना ने जिले में पशु सुरक्षा और अवैध तरीकों से संपत्तियों की घेराबंदी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वह न केवल इस मामले में निष्पक्ष जांच करे, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाए।
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