सूत्रों के अनुसार, अमिताभ ठाकुर का इलाज लखनऊ के एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था और वह डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाएं लेते थे। 10 दिसंबर को जेल आने के बाद शुरुआती दिनों में केवल उनका ब्लड प्रेशर चेक किया गया, इसके बाद उन्हें सामान्य बंदी मानते हुए बैरक में भेज दिया गया। जेल में रहते हुए वह लगातार न्यायालय में पेशी के लिए आते-जाते रहे, लेकिन इस दौरान जेल अस्पताल में उनकी हृदय से जुड़ी कोई विशेष जांच नहीं कराई गई।
बताया जा रहा है कि ठंड के मौसम में रक्त को गाढ़ा होने से बचाने के लिए वह गर्म पानी का सेवन करते थे, लेकिन जिला कारागार में उन्हें ठंडा पानी ही उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा उनकी नियमित दवाएं भी कुछ दिन पहले खत्म हो चुकी थीं, जिसकी जानकारी उन्होंने जेल प्रशासन या चिकित्सक को नहीं दी।
6 जनवरी को जमानत अर्जी खारिज होने के बाद जेल लौटने पर देर रात अमिताभ ठाकुर को सीने में तेज दर्द उठा। स्थिति बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उन्हें तत्काल देवरिया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहां हालत में कुछ सुधार होने पर चिकित्सकों ने आगे के इलाज के लिए उन्हें लखनऊ भेज दिया।
जेल सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले जिला कारागार में बंदियों द्वारा की गई भूख हड़ताल का असर भी उनके स्वास्थ्य पर पड़ा हो सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर जेल प्रशासन खुलकर कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है।
इस संबंध में जेल अधीक्षक परमेश्वर शुक्ला ने बताया कि जेल में रहते हुए अमिताभ ठाकुर ने अपनी हृदय रोग संबंधी किसी बीमारी की जानकारी नहीं दी थी। उन्हें अन्य बंदियों की तरह सभी सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। दवाएं समाप्त होने या दवा न लेने की जानकारी भी जेल प्रशासन को नहीं थी।
2 thoughts on “पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की बीमारी से अनजान रहा जेल प्रशासन, न जांच हुई न दवाएं मिलीं”