जानकारी के मुताबिक, 10 जनवरी को वॉशरूम जाने के दौरान धनखड़ को दो बार बेहोशी के दौरे पड़े थे। इसके बाद वह सोमवार को नियमित जांच के लिए एम्स पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें भर्ती होने की सलाह दी। फिलहाल उनकी हालत पर डॉक्टरों की एक टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
यह पहली बार नहीं है जब पूर्व उपराष्ट्रपति को इस तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए वे कच्छ, उत्तराखंड, केरल और दिल्ली में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कई बार अचानक बेहोश हो चुके हैं।
स्वास्थ्य कारणों से छोड़ा था उपराष्ट्रपति पद
गौरतलब है कि 21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टरों की सलाह का पालन करने के उद्देश्य से वह संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके बाद हुए चुनाव में सी.पी. राधाकृष्णन को देश का नया उपराष्ट्रपति चुना गया।
कौन हैं जगदीप धनखड़
जगदीप धनखड़ राजस्थान के रहने वाले हैं और किसान परिवार से आते हैं। वे जाट समुदाय से संबंध रखते हैं। उनके करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में हुई। 1979 में राजस्थान बार काउंसिल में नामांकन के बाद, उन्होंने 1990 में राजस्थान हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचान बनाई। संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता के चलते वे सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख वकीलों में शामिल रहे।
उन्होंने सतलुज नदी जल विवाद जैसे मामलों में हरियाणा सहित कई राज्यों का प्रतिनिधित्व किया और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। राजनीति में उन्होंने 1989 में झुंझुनू से लोकसभा सांसद बनकर प्रवेश किया और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे। इसके बाद 1993 से 1998 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रहे।
2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और 2022 में भारत के उपराष्ट्रपति बनने तक धनखड़ ने कई संवैधानिक पदों पर अपनी भूमिका निभाई। उनकी वक्तृत्व कला और संवैधानिक ज्ञान की व्यापक सराहना होती रही। उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, संस्कृत भाषा के उपयोग को बढ़ावा दिया और आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का समर्थन किया।