बोलता सच : जिले के नौतन हथियागढ़ गांव के पास जंगलों में अवैध पटाखा निर्माण का बड़ा खुलासा हुआ है। शनिवार को ग्रामीणों ने छोटी गंडक नदी के किनारे घनी झाड़ियों के बीच पटाखों और बारूद का जखीरा देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बड़ी मात्रा में अर्ध-निर्मित और तैयार पटाखे, बारूद और निर्माण सामग्री बरामद की है।
जंगल में चल रही थी मिनी पटाखा फैक्ट्री
स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से छिपकर पटाखा बनाने का काम चल रहा था। घने जंगल और नदी किनारे होने के कारण यह अवैध गतिविधि अब तक नजरों से बची रही। पटाखों की त्योहारी सीजन में अवैध सप्लाई के लिए तैयारी की जा रही थी।
सरकारी स्कूल की किताबें बन रहीं बारूद की लपेटन
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ – मौके से वर्ष 2025-26 की परिषदीय विद्यालयों की बड़ी संख्या में पुस्तकें बरामद हुईं। इन किताबों के पन्नों को पटाखों की लपेटन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। यह सवाल अब विभाग के सामने खड़ा है कि छात्रों को वितरित की जाने वाली ये किताबें आखिर पटाखा बनाने वालों तक कैसे पहुंचीं। प्राथमिक आशंका है कि इन पुस्तकों की कालाबाजारी हुई है।
पुलिस ने जब्त किया बारूद, जांच जारी
पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर पटाखे और विस्फोटक सामग्री जब्त कर ली है। अधिकारियों के अनुसार, इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन को पहले से इस गतिविधि की जानकारी नहीं थी, जबकि इलाके में लंबे समय से यह काम चल रहा था। बारूद के भंडारण ने पूरे गांव को खतरे में डाल दिया था।
कई गंभीर सवाल खड़े
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परिषदीय विद्यालय की किताबें पटाखा कारोबारियों तक कैसे पहुंचीं?
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क्या शिक्षा विभाग की ओर से इन किताबों की सही निगरानी नहीं हो रही?
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पटाखों की यह अवैध फैक्ट्री कब से चल रही थी और कौन लोग शामिल हैं?
देवरिया के इस मामले ने न केवल अवैध पटाखा निर्माण की गंभीरता को उजागर किया है, बल्कि शिक्षा विभाग की लापरवाही को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और जिम्मेदार लोगों को कब तक जवाबदेह ठहराया जाता है।
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