बोलता सच,नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 एवं 2 के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 13 फरवरी का दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत का साक्षी बन रहा है। उन्होंने इसे विक्रम संवत् 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का शुभ दिन बताते हुए कहा कि इस तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है और इस दिन लिया गया संकल्प सफलता की ओर अग्रसर होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद South Block और North Block जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक नीतियां और फैसले लिए गए, लेकिन ये भवन ब्रिटिश शासन की सोच और प्रतीक के रूप में निर्मित किए गए थे। उनके अनुसार, इनका उद्देश्य औपनिवेशिक शासन व्यवस्था को मजबूत करना था।
उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यहां से लिए जाने वाले निर्णय 140 करोड़ देशवासियों की सोच और अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पुराने भवनों से जुड़ी स्मृतियां देश के इतिहास का अभिन्न हिस्सा हैं। इसलिए उन्हें संग्रहालय के रूप में विकसित कर देश को समर्पित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस ऐतिहासिक विरासत से परिचित हो सकें।
अपने संबोधन में उन्होंने 2014 के बाद ‘गुलामी की मानसिकता’ से मुक्ति के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्मारकों और स्थलों के नामकरण व पुनर्विकास के माध्यम से शासन की सोच को सेवा-भावना की दिशा में परिवर्तित किया गया है। उन्होंने इसे सत्ता के मिजाज में बदलाव और जनता-केंद्रित प्रशासन की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
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