(बोलता सच न्यूज़): मानसून का मौसम जहां राहत और ठंडक लेकर आता है, वहीं यह संक्रामक बीमारियों के लिए अनुकूल वातावरण भी बनाता है। खासतौर पर हैपेटाइटिस-ए और ई जैसे वायरल संक्रमण बरसात में तेज़ी से फैलते हैं। दूषित पानी और असुरक्षित खानपान इनके प्रमुख कारण हैं। समय रहते सावधानी बरतकर इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
लिवर पर होता है सीधा असर
हैपेटाइटिस-ए और ई दोनों का सीधा प्रभाव लिवर पर पड़ता है। संक्रमण की शुरुआत आमतौर पर बुखार, भूख न लगना, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षणों से होती है, जो 3-4 दिन तक रहते हैं। इसके बाद पीलिया विकसित हो सकता है—जिसके संकेतों में आंखों और त्वचा में पीलापन, गहरे पीले रंग का पेशाब और थकावट शामिल हैं। पीलिया 2 से 8 हफ्तों तक बना रह सकता है।
कुछ मामलों में यह संक्रमण अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, हैपेटाइटिस-ए से अग्न्याशय और मस्तिष्क में सूजन हो सकती है। गंभीर संक्रमण में लिवर फेल्योर की स्थिति तक पहुंचने का खतरा रहता है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं में विशेष खतरा
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हैपेटाइटिस-ए: आमतौर पर 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में इसके लक्षण हल्के होते हैं। लेकिन किशोरों और वयस्कों में संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है।
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हैपेटाइटिस-ई: यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। गर्भवती महिलाओं में यह संक्रमण गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है और मां व गर्भस्थ शिशु दोनों को खतरे में डाल सकता है।
जांच और उपचार
हैपेटाइटिस-ए और ई की पुष्टि के लिए निम्नलिखित जांचें की जाती हैं:
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खून की जांच और लिवर फंक्शन टेस्ट
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वायरस की पहचान के लिए एंटीबॉडी टेस्ट
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सोनोग्राफी और मल की जांच
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प्रोथ्रोम्बिन टाइम (INR) टेस्ट — जो लिवर की कार्यक्षमता का संकेत देता है
उपचार:
इन संक्रमणों के 99.5% मामले दवाओं और विश्राम से अपने आप ठीक हो जाते हैं। केवल 0.5% मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि एक्यूट लिवर फेल्योर के कारण आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ती है। यदि मरीज़ को खाना खाने में कठिनाई हो रही हो, तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना ज़रूरी है।
बचाव के लिए अपनाएं ये एहतियात
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खानपान: केवल घर का बना, ताज़ा और पूरी तरह पका हुआ भोजन खाएं। अधपका या स्ट्रीट फूड न खाएं।
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पेयजल: केवल RO या उबला हुआ पानी पीएं।
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साफ-सफाई:
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फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
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शौच के बाद और खाने से पहले साबुन से हाथ धोना न भूलें।
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घर और आसपास की स्वच्छता बनाए रखें।
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भोजन का भंडारण: बचे हुए भोजन को ठीक तरह से स्टोर करें; खराब हुआ खाना बिल्कुल न खाएं।
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विशेष ध्यान:
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गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता पर खास ध्यान देना चाहिए।
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भीड़-भाड़ या गंदगी वाले इलाकों से बचें।
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टीकाकरण भी है ज़रूरी
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हैपेटाइटिस-ए के लिए सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है।
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हैपेटाइटिस-ई के लिए वैक्सीन विकसित हो चुकी है, लेकिन यह अभी भारत में उपलब्ध नहीं है।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
यदि बुखार, भूख न लगना, आंखों या पेशाब का रंग बदलना, थकावट या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना परामर्श के दवा लेना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
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