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हादी हत्याकांड से बांग्लादेश में बवाल, कट्टरपंथी संगठनों को मिल सकता है राजनीतिक फायदा

Bolta Sach News
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Hadi murder sparks uproar in Bangladesh

बोलता सच,ढाका: भारत विरोधी कट्टरपंथी नेता और ढाका-8 सीट से उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद बांग्लादेश में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी और अराजकता की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक पुलिस जांच से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है और न ही किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई है। इस बीच आम चुनाव नजदीक होने के कारण यह सवाल तेज हो गया है कि हादी की हत्या से आखिर राजनीतिक फायदा किसे होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटना से न तो शेख हसीना की अवामी लीग और न ही खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को कोई प्रत्यक्ष लाभ मिलता दिख रहा है। इसके उलट, कट्टरपंथी संगठनों के मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है।

जमात से जुड़ते दिखे हत्याकांड के तार

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, BNP की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद नीलोफर चौधरी मोनी ने आरोप लगाया है कि जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील मोहम्मद शिशिर मोनी ने उस्मान हादी की हत्या के आरोपी फैसल करीम को पिछले दो वर्षों में दो बार जमानत दिलाने में मदद की थी।
शिशिर मोनी, जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर के पूर्व केंद्रीय सचिव रह चुके हैं और आगामी फरवरी चुनाव में सुनामगंज-2 सीट से जमात के उम्मीदवार हैं।

कौन था शरीफ उस्मान हादी

शरीफ उस्मान हादी एक कट्टर भारत विरोधी नेता था और शेख हसीना विरोधी संगठन ‘इंकलाब मंच’ का प्रवक्ता भी था। 12 दिसंबर को बाइक सवार नकाबपोश हमलावरों ने उसे सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई।

भारत विरोधी नैरेटिव गढ़ने की कोशिश

हत्या के बाद कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों और भारत विरोधी नेताओं ने दावा किया कि आरोपी फैसल करीम भारत भाग गया है। हालांकि, ढाका पुलिस ने दोहराया कि उनके पास इस दावे का कोई ठोस सबूत नहीं है और आरोपी के ठिकाने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है।

इसके बावजूद, इन समूहों ने फैसल करीम को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब प्रतिबंधित अवामी लीग से जोड़ने की कोशिश की और भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया। इस बीच, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने औपचारिक रूप से भारत से संपर्क कर सहयोग की अपील की है।

भारतीय मिशनों को बनाया गया निशाना

हादी की मौत की पुष्टि के बाद भारत विरोधी बयानबाजी और तेज हो गई। ढाका समेत कई जगहों पर भारतीय राजनयिक मिशनों के बाहर प्रदर्शन हुए और नारेबाजी की गई। कुछ मामलों में मिशनों को निशाना भी बनाया गया।

कट्टरपंथी संगठनों को मिल सकता है फायदा

पेरिस में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के राजनीतिक विश्लेषक नाहिद हेलाल का कहना है कि हादी की हत्या से सबसे ज्यादा फायदा जमात और उससे जुड़े कट्टरपंथी गुटों को होता दिख रहा है। उनके मुताबिक,
“इस हत्या ने कट्टरपंथियों को अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, मीडिया को डराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का मौका दे दिया है।”

हेलाल का तर्क है कि ढाका-8 सीट पर BNP के वरिष्ठ नेता मिर्जा अब्बास पहले से मजबूत स्थिति में थे और हादी एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर राजनीतिक रूप से ज्यादा प्रभावी नहीं थे। वहीं, इस सीट से इस्लामी छात्र शिबिर के केंद्रीय नेता मोहम्मद अबू सादिक कायएम भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे हादी के हटने का फायदा जमात से जुड़े संगठनों को मिल सकता है।

बढ़ती अस्थिरता से चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि इस हत्या के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता का इस्तेमाल कट्टरपंथी संगठन चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने और हिंसा फैलाने के लिए कर सकते हैं। इंकलाब मंच ने भी यूनुस सरकार को चेतावनी देते हुए बड़े आंदोलन की धमकी दी है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और तनावपूर्ण होने की आशंका जताई जा रही है।


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