बोलता सच ( देवरिया ) HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस के सर्वेयर व अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैया से पॉलिसी होल्डर परेशान, दोगुने दाम में कार पैकेज पालिसी खरीदने के बावजूद वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्लेम डिक्लाइन कर सर्वेयर व अधिकारियों की मिलीभगत से पॉलिसी होल्डर का हो रहा है आर्थिक व मानसिक शोषण ।
देश की प्रमुख बीमा कंपनियों में गिनी जाने वाली HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस अपने ग्राहकों के प्रति किस तरह का व्यवहार कर रही है, इसका हालिया उदाहरण सामने आया है। एक पुराने बीमा धारक ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके वैध क्लेम को न केवल अनावश्यक रूप से रोका गया बल्कि उनके साथ अभद्रता और मानसिक उत्पीड़न भी किया गया। ग्राहक के अनुसार, उन्होंने अपनी मारुती कार के लिए HDFC ERGO से जीरो डेप्रीसिएशन पॉलिसी ली थी, जो Maruti Insurance Broker के माध्यम से जारी की गई थी। मई 2025 में सड़क पर एक गाय को बचाने के चक्कर में उनकी गाड़ी के बाएँ हिस्से में हल्की खरोंचें आईं। मरम्मत के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर में वाहन भेजा गया और क्लेम प्रक्रिया शुरू हुई। HDFC ERGO के सर्वेयर ने 25 मई 2025 को फोन कर घटना की जानकारी ली। आश्चर्यजनक रूप से अगले दिन फिर वही सवाल पूछे गए। 29 मई को पुनः फोन आया, जिसमें उनका व्यवहार न केवल असभ्य और अव्यावसायिक था, बल्कि उन्होंने ग्राहक पर अप्रत्यक्ष रूप से रिश्वत माँगने का संकेत भी दिया।
सबसे गंभीर बात यह है कि जब ग्राहक ने इस दुर्व्यवहार के खिलाफ 11 जून 2025 को शिकायत दर्ज कराई (रिफ. नं. 102972469), तो अगले दिन यानी 12 जून 2025 को दोपहर 2:48 बजे उन्हें HDFC ERGO के एक मोबाइल नंबर से कॉल आया। इस कॉल में प्रतिनिधि द्वारा सर्वेयर का ही पक्ष लेते हुए स्पष्ट रूप से धमकाने वाले शब्दों में कहा गया कि यदि पहले से पता होता कि आप सर्वेयर की शिकायत उच्चधिकारियो को करेंगे तो आपका क्लेम कभी पास नहीं किया जाता — चाहे वह पूरी तरह से वैध ही क्यों न था । जिससे स्पस्ट होता है नीचे से ऊपर तक सबकी मिली भगत से ही धनउगाही का अवैध धंधा चल रहा है जिससे एक तरफ तो ये लोग कंपनी को करोड़ो के चूना लगा रहे है साथ ही वास्तविक व सही क्लेम को भी अकारण अस्वीकृत कर पालिसी होल्डर को परेशान करने के साथ ही उनका आर्थिक शोषण भी कर रहे है यदि कोई जागरूक पालिसी होल्डर इनकी शिकायत उच्च अधिकारियो से कर देता है तो कॉल कर के इनके स्वपोषित गुंडे शिकायतकर्ता को धमकाते भी है
क्या इस देश में बीमा पॉलिसी का दावा इस आधार पर नकारा जाएगा कि ग्राहक ने अपने अधिकारों का उपयोग कर शिकायत दर्ज कर दी ? क्या यह HDFC ERGO की नीति का हिस्सा है ?
इस पूरे घटनाक्रम से उठते हैं कई गंभीर सवाल:
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क्या HDFC ERGO में ग्राहक सेवा के मानक इतने गिर गए हैं कि वैध क्लेम को भी व्यक्तिगत मनमानी के आधार पर रोका या अस्वीकार किया जा सकता है ?
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क्या बीमा सर्वेयर ग्राहकों को मानसिक दबाव देकर अवैध लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं?
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कंपनी के सीनियर अधिकारियों को सूचित करने पर भी यदि यही रवैया जारी रहता है, तो ग्राहकों का भरोसा कैसे बना रहेगा?
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
यह घटना सभी बीमा उपभोक्ताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रीमियम भरने के बाद भी यदि ग्राहक को अपमान, धमकी और मनमानी का सामना करना पड़े तो HDFC ERGO जैसी कंपनियों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
निष्कर्ष
बीमा नियामक IRDAI और उपभोक्ता फोरम को इस प्रकरण का संज्ञान लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी ग्राहक इस प्रकार की धोखाधड़ी और दुर्व्यवहार का शिकार न हो। साथ ही, HDFC ERGO को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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