प्राधिकरण को शिकायत मिली थी कि कुछ कॉलोनाइजर डूब क्षेत्र की जमीन पर अवैध रूप से प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाने की कोशिश कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि रोहिल्लापुर के खसरा संख्या 22 और 33 की यह भूमि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में आती है और पूरी तरह प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में स्थित है। इसके बावजूद बिना अनुमति और नक्शा स्वीकृति के निर्माण कराया जा रहा था।
पुलिस बल की मौजूदगी में दो घंटे चली कार्रवाई
ध्वस्तीकरण अभियान परियोजना विभाग के वर्क सर्किल-3 की टीम ने पुलिस बल के सहयोग से अंजाम दिया। वर्क सर्किल-3 के प्रभारी राजेश कुमार निम के नेतृत्व में प्रबंधक लव शंकर भारती और उनकी टीम ने प्राधिकरण के सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को गिरा दिया। करीब दो घंटे चली इस कार्रवाई में पूरी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह ने बताया कि डूब क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।
एसीईओ ने की जनता से अपील
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने अवैध निर्माण करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति या नक्शा पास कराए कोई भी निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि ग्रेटर नोएडा में जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण के भूलेख विभाग से पूरी जानकारी जरूर लें, ताकि अवैध कॉलोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई फंसने से बच सकें।
15 दिनों में पांच बड़ी कार्रवाई
प्राधिकरण ने बीते 15 दिनों में अतिक्रमण के खिलाफ लगातार बड़ी कार्रवाइयां की हैं। 20 जनवरी को भनौता में 11,340 वर्ग मीटर, 28 जनवरी को हैबतपुर में 6,000 वर्ग मीटर, 4 फरवरी को फिर भनौता में 10,000 वर्ग मीटर और अब रोहिल्लापुर में 18,000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। इसके अलावा 29 जनवरी को खेड़ा चौगानपुर में आठ टावरों के 100 से अधिक अवैध फ्लैटों को सील किया गया।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप मचा हुआ है। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।