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गुमशुदा लोगों की तलाश में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, शीर्ष अफसरों से मांगा जवाब

Bolta Sach News
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In search of missing people
बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश को लेकर प्रशासन और पुलिस के सुस्त रवैए पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को गंभीर मानते हुए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से निजी हलफनामे पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर दोनों वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित होंगे।

हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों से यह भी पूछा है कि प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए आखिर कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है और बीते दो वर्षों में लगभग एक लाख लोगों के लापता होने के बावजूद उनकी प्रभावी तलाश क्यों नहीं हो सकी। अदालत ने कहा कि यदि इस संबंध में कोई स्पष्ट कार्यप्रणाली या मानक प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद नहीं है, तो इसे तत्काल तैयार किया जाना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को राजधानी लखनऊ के चिनहट निवासी विक्रमा प्रसाद की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में विक्रमा प्रसाद ने अपने 32 वर्षीय बेटे के जुलाई 2024 से लापता होने का हवाला देते हुए पुलिस को उसकी तलाश के निर्देश देने की मांग की थी।

इस मामले में इससे पहले 29 जनवरी को अदालत के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव (गृह) की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया था। इस हलफनामे में बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में करीब 1 लाख 8 हजार 300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज हुईं। हालांकि, इनमें से केवल लगभग 9 हजार मामलों में ही तलाश की कार्रवाई शुरू की गई।

इन आंकड़ों को देखकर हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताई और इसे “अचंभित करने वाला” करार दिया। अदालत ने कहा कि गुमशुदा लोगों की तलाश का यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस पूरे मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए “इन-री: मिसिंग पर्सन्स इन द स्टेट” शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस जनहित याचिका को सुनवाई के लिए 5 फरवरी को समुचित खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। अदालत के इस सख्त रुख से यह संकेत साफ है कि गुमशुदा लोगों की तलाश में बरती जा रही लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी।


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