बोलता सच,लखनऊ : प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों के समग्र विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजनाओं को मंजूरी दी गई है। राज्य में सिख, जैन, बौद्ध और मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए कुल 364 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, खेल, महिला एवं बाल कल्याण और शहरी-ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
पीएमजेवीके के तहत सबसे अधिक ध्यान शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर दिया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग की 10 परियोजनाओं के लिए 114.14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
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माध्यमिक शिक्षा के लिए 12.78 करोड़ रुपये
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प्राविधिक शिक्षा के लिए 42.53 करोड़ रुपये
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चिकित्सा शिक्षा के लिए 27.88 करोड़ रुपये
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व्यावसायिक शिक्षा के लिए 25.02 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, यूनानी चिकित्सा विभाग की परियोजनाओं के लिए 24.98 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
युवाओं, महिलाओं और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा
अल्पसंख्यक युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास की परियोजनाओं पर 5.92 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वहीं, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से शारीरिक और खेल क्षमता के विकास हेतु 64.22 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है।
महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 7.79 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों के पोषण, सुरक्षा और सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
शहरी-ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विस्तार
अल्पसंख्यक बहुल शहरी क्षेत्रों में नगरीय सुविधाओं के विकास के लिए 6 परियोजनाओं पर 22.12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में:
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पंचायती राज विभाग की 2 परियोजनाओं के लिए 3.94 करोड़ रुपये
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कृषि एवं सहकारिता विभाग की 3 परियोजनाओं के लिए 10.15 करोड़ रुपये
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दुग्ध विकास विभाग के लिए 1.92 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि पीएमजेवीके के माध्यम से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, रोजगार के अवसर और जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह पहल सामाजिक समावेशन और संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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