इस मौके पर गडकरी ने कहा कि भारत अब ईंधन आयातक से निर्यातक देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह बदलाव इथेनॉल, मेथनॉल और हरित हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के बढ़ते उत्पादन और उपयोग से संभव हुआ है। मंत्री ने ओडिशा के लिए केंद्रीय सड़क निधि (CRF) के तहत 1,000 करोड़ रुपये की घोषणा भी की।
सड़क सुरक्षा और नवाचार पर जोर
गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य भारत को तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा—
“हमारा मिशन भारत को विश्वगुरु बनाना है। इसके लिए जल, बिजली, परिवहन और संचार क्षेत्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की जरूरत है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नवाचार और टिकाऊ गतिशीलता समाधानों पर आधारित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। उन्होंने इंजीनियरों से आग्रह किया कि वे सटीक डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) और सुरक्षित राजमार्ग डिज़ाइन पर ध्यान केंद्रित करें।
गडकरी ने बताया कि राजमार्ग निर्माण में बायो-बिटुमेन और पुनर्चक्रित प्लास्टिक कचरे का उपयोग न केवल लागत कम कर रहा है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे को भी बढ़ावा दे रहा है।
सम्मेलन का उद्देश्य
कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, मुख्य सचिव मनोज अहूजा, आईआरसी अध्यक्ष मनोरंजन पारिदा और विश्व सड़क संघ के उपाध्यक्ष धर्मानंद सारंगी भी मौजूद थे।
चार दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में देशभर से लगभग 3,500 इंजीनियर, वैज्ञानिक और प्रशासक भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है—
➡️ सतत, लचीला और पर्यावरण-अनुकूल सड़क बुनियादी ढांचा विकसित करना,
➡️ जो तेजी से शहरीकरण, तकनीकी बदलाव और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर सके।
गडकरी ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले वर्षों में हरित और टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीक में दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।