1 फरवरी 1977 को भारत के बढ़ते समुद्री हितों की रक्षा और समुद्री चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से तटरक्षक बल की स्थापना की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में यह बल केवल सात सतही प्लेटफॉर्म के साथ अस्तित्व में आया था, जबकि आज यह 155 जहाजों और 80 विमानों के साथ एक सशक्त समुद्री शक्ति के रूप में कार्य कर रहा है।
तटरक्षक बल ने वर्ष 2030 तक अपनी क्षमता और बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत जहाजों की संख्या 200 और विमानों की संख्या 100 तक पहुंचाने की योजना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थापना के बाद से अब तक तटरक्षक बल 11,800 से अधिक लोगों की जान बचा चुका है। भारतीय तटरक्षक बल को समुद्री कानून प्रवर्तन, तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहायता जैसे अहम दायित्व सौंपे गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना के साथ समन्वय, लक्षद्वीप में साहसिक बचाव अभियानों और हाल के महीनों में केरल तट के पास हुई तीन बड़ी समुद्री घटनाओं से सफलतापूर्वक निपटने में भी बल की अहम भूमिका रही है।
तटरक्षक बल में महिलाओं को भी समान अवसर प्रदान किए जाते हैं। समुद्र, आकाश और भूमि आधारित सभी भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे कार्यस्थल पर सम्मानजनक और सकारात्मक वातावरण बनता है।
प्रधानमंत्री के ‘अमृत काल’ विजन से प्रेरित भारतीय तटरक्षक बल, SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) और MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा व विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) जैसे सिद्धांतों को साकार करने में भी एक प्रमुख स्तंभ के रूप में कार्य कर रहा है। स्थापना दिवस से पहले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भारतीय तटरक्षक बल को शुभकामनाएं दी हैं।