बोलता सच,नई दिल्ली : भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने स्क्रैमजेट इंजन से जुड़े एक बेहद अहम परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस सफलता के साथ भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल निर्माण की राह में आने वाली सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती को पार कर लिया है। रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, DRDL ने 9 जनवरी 2026 को अपनी अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (SCPT) फैसिलिटी में एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल-स्केल कंबस्टर का लंबी अवधि का ग्राउंड टेस्ट किया। इस दौरान इंजन ने 12 मिनट से अधिक का सफल रन टाइम हासिल किया, जो हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से पांच गुना से भी अधिक, यानी लगभग 6,100 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। इस गति को हासिल करने के लिए अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया जाता है, जो सुपरसोनिक अवस्था में दहन (कंबशन) करता है। SCPT फैसिलिटी में किए गए इस परीक्षण ने न केवल स्क्रैमजेट कंबस्टर के उन्नत डिजाइन को प्रमाणित किया, बल्कि देश की अत्याधुनिक टेस्टिंग क्षमताओं को भी सफलतापूर्वक साबित किया है।
यह उपलब्धि 25 अप्रैल 2025 को किए गए सब-स्केल स्क्रैमजेट टेस्ट की निरंतरता में हासिल हुई है। कंबस्टर और टेस्ट फैसिलिटी को DRDL द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया, जबकि इसे उद्योग साझेदारों के सहयोग से साकार किया गया। यह सफलता भारत को उन्नत एयरोस्पेस और हाइपरसोनिक तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी देशों की कतार में मजबूती से खड़ा करती है।
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, उद्योग साझेदारों और अकादमिक संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और ठोस आधार तैयार करती है। वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस महत्वपूर्ण सफलता के लिए परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों की सराहना की।
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