बोलता सच,देवरिया/तरकुलवा : केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) तरकुलवा क्षेत्र में ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में आज भी शुद्ध पेयजल लोगों की पहुंच से बाहर है। कहीं पानी की टंकी बनकर शोपीस बन गई है, तो कहीं निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।
मठिया रत्ती: 2 करोड़ से ज्यादा खर्च, सिर्फ एक हफ्ते मिला पानी
मठिया रत्ती गांव में करीब पांच साल पहले 206.96 लाख रुपये की लागत से पानी की टंकी बनाई गई। पाइपलाइन बिछाई गई, घर-घर टोंटी भी लगाई गई, लेकिन महज एक सप्ताह पानी की सप्लाई होने के बाद व्यवस्था ठप हो गई। गांव की करीब दो हजार आबादी आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
सड़कें टूटीं, पानी नहीं मिला
ग्रामीणों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के नाम पर गांव की अच्छी-खासी सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है। न मरम्मत हुई, न जलापूर्ति शुरू हुई। इससे रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
बंजरिया: 23 साल में भी नहीं बहा पानी
बंजरिया गांव में साल 2003 में करीब 60 लाख रुपये की लागत से पानी की टंकी बनाई गई थी। बिजली कनेक्शन, 25 केवी ट्रांसफार्मर, ऑपरेटर की तैनाती—सब कुछ किया गया, लेकिन 23 साल बाद भी गांव में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी।
कई गांवों में अधूरा या ठप पड़ा काम
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कैथवलिया: ठेकेदार टंकी का निर्माण अधूरा छोड़कर फरार
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नरहरपट्टी: टंकी बनकर तैयार, लेकिन जलापूर्ति शून्य
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कनकपुरा, परसौनी, बेलही, भरौटा, महुआपाटन, सरैनी, बरईपट्टी, खैराट: निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश, जवाबदेही पर सवाल
लगातार देरी और लापरवाही से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं हुई और सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासनिक चुप्पी सवालों के घेरे में
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो ठेकेदारों पर कार्रवाई हो रही है और न ही अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है। जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना क्षेत्र में फाइलों तक सिमटती नजर आ रही है।
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