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बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से जुड़े दूसरे बड़े नेता की हत्या, खुलना में एनसीपी नेता मोतालेब सिकदर को गोली मारी

Bolta Sach News
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Joined the student movement in Bangladesh
बोलता सच,देश/दुनिया : बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी शहर खुलना में सोमवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद मोतालेब सिकदर की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। यह हमला अगस्त 2024 में हुए हिंसक छात्र विद्रोह से जुड़े दूसरे प्रमुख नेता पर हुआ है। घटना से देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एनसीपी की जॉइंट प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर महमूदा मिटू ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इस हमले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मोहम्मद मोतालेब सिकदर, जो एनसीपी के खुलना डिवीजन हेड और पार्टी के वर्कर्स फ्रंट के सेंट्रल कोऑर्डिनेटर थे, को कुछ मिनट पहले गोली मार दी गई। हमले के बाद इलाके में तनाव फैल गया है।

हादी हत्याकांड से जुड़ती कड़ियां

मोतालेब सिकदर पर हुआ यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश अभी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के सदमे से उबर भी नहीं पाया है। 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने 32 वर्षीय हादी के सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादी फरवरी में होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार भी थे।

अंतरिम सरकार पर उठे सवाल

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हादी की मौत के बाद देशभर में शोक दिवस मनाया था और दोषियों को जल्द पकड़ने का भरोसा दिया था। हालांकि, अब खुलना में हुई इस ताजा हत्या ने सरकार की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादी की हत्या के बाद ढाका और अन्य बड़े शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे और अब खुलना की घटना से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

छात्र आंदोलन से बनी पार्टी

नेशनल सिटिजन पार्टी की स्थापना इसी साल 28 फरवरी को हुई थी। यह पार्टी ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ और ‘जातीय नागरिक समिति’ के नेतृत्व में बनी और इसे बांग्लादेश की पहली छात्र-नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टी माना जाता है। पार्टी का गठन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हुआ था। लगातार हो रहे हमलों से इस नई राजनीतिक ताकत के भविष्य और देश की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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