बोलता सच/कानपुर :आजादी के बाद देश में राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों की लंबी श्रृंखला देखने को मिली। सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं, कई शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम भी बदल दिए गए। लेकिन कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन एक ऐसे औपनिवेशिक निशान के साथ आज भी खड़ा है, जिसके बदलाव की चर्चा तो कई बार हुई, लेकिन कदम कभी उठाया नहीं गया। यह स्टेशन आज भी अपने ब्रिटिश काल के स्टेशन कोड—सीएनबी (CNB)—से ही संचालित होता है। यह कोड अंग्रेजों द्वारा दिए गए पुराने नाम ‘Cawnpore North Barrack’ का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ था कानपुर का उत्तरी सैन्य बैरक क्षेत्र।
आज भी किसी भी आरक्षित या अनारक्षित टिकट पर कानपुर सेंट्रल के आगे स्टेशन कोड CNB ही दर्ज होता है। यही कोड भारतीय रेलवे के तकनीकी, प्रशासनिक और डिजिटल रिकॉर्ड में भी शामिल है। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख स्टेशनों और शहरों के नाम बदले जा चुके हैं, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कानपुर सेंट्रल का कोड आज भी अंग्रेजी हुकूमत की देन क्यों बना हुआ है।
प्रदेश के कई शहरों और स्टेशनों के बदले गए नाम
पिछले कुछ वर्षों में यूपी में कई ऐतिहासिक नाम बदलकर नए नाम रखे गए हैं। उदाहरणस्वरूप—
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फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया।
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इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखा गया।
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मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया।
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झांसी जंक्शन का नाम वीरांगना लक्ष्मीबाई जंक्शन रखा गया।
इन तमाम बदलावों के बावजूद कानपुर सेंट्रल के स्टेशन कोड को बदलने की प्रक्रिया आज भी अटकी हुई है।
कोड बदलना केवल नाम बदलना नहीं—पूरी प्रणाली को छूता है बदलाव
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार स्टेशन का कोड बदलना एक बेहद जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया है। यह केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि रेलवे की पूरी प्रणाली पर असर डालने वाला कदम होता है।
रेलवे यातायात प्रबंधक आशुतोष सिंह बताते हैं:
“कोड बदलने का असर टिकटिंग सिस्टम, मालगाड़ी रजिस्टर, आरक्षण डेटा, रूट डायग्राम, लाखों ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स तक पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रेलवे कोड बदलने से अक्सर बचती है।”
वे स्पष्ट करते हैं कि स्टेशन का नाम बदलना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन स्टेशन कोड बदलना रेलवे बोर्ड का अत्यंत तकनीकी और व्यापक निर्णय होता है। इसलिए वर्षों से यह कोड जैसा है, वैसा ही रखा गया है।
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक सफर
कानपुर स्टेशन का इतिहास डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुराना है—
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1859: कानपुर में पहली रेलवे लाइन बिछाई गई। उस समय शहर का अंग्रेजी नाम Cawnpore दर्ज था।
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1900–1925: यह क्षेत्र ब्रिटिश सेना की बैरक का मुख्य केंद्र बना। यहीं से स्टेशन का नाम Cawnpore North Barrack पड़ा।
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1928: नए टर्मिनल स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
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1930: स्टेशन को आम जनता के लिए खोला गया।
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1947 के बाद: शहर का नाम आधिकारिक रूप से कानपुर कर दिया गया, लेकिन स्टेशन कोड CNB वहीं का वहीं रह गया।
क्या बदलेगा स्टेशन कोड?
रेलवे सूत्र बताते हैं कि कोड बदलने की प्रक्रिया पर चर्चा कई बार हुई है, लेकिन तकनीकी जटिलताओं और व्यापक बदलावों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य या केंद्र सरकार औपचारिक प्रस्ताव भेजे, तो रेलवे बोर्ड इस पर विचार कर सकता है।
कुल मिलाकर, कानपुर सेंट्रल का स्टेशन कोड CNB आज भी एक ऐसे इतिहास का हिस्सा है, जो देश की आजादी और आधुनिक विकास के बावजूद समय के पन्नों से मिटाया नहीं जा सका है।
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