बोलता सच,धार्मिक : यह सर्वविदित है कि जैसा कर्म मनुष्य करता है, वैसा ही फल उसे प्राप्त होता है। कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता, वह केवल समय और परिस्थितियों के अनुसार अपना रूप बदल लेता है। जैसे विज्ञान में कहा गया है कि पदार्थ नष्ट नहीं होता, केवल रूपांतरित होता है, उसी प्रकार किया गया कर्म भी देर-सवेर सुख या दुख के रूप में व्यक्ति के जीवन में प्रकट होता है।
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