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खरमास और पुरुषोत्तम (अधिक) मास का धार्मिक महत्व

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Kharmas and Purushottam (extra) month

बोलता सच,धार्मिक : जब ग्रहराज सूर्य अपने गोचर भ्रमण के दौरान धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब की अवधि को खरमास कहा जाता है। खरमास वर्ष में दो बार आता है।
वहीं मलमास तीन वर्ष में एक बार आता है, जिसे सामान्यतः अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार “मलमास” शब्द का प्रयोग अशुभ माना गया है, क्योंकि ऐसा करने से व्यक्ति के पुण्य क्षीण हो सकते हैं। इसी कारण इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

पुरुषोत्तम मास की पौराणिक मान्यता

पुराणों के अनुसार असुर हिरण्यकश्यप को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु बारह मासों में से किसी भी मास में नहीं होगी। इस वरदान को निष्फल करने के लिए भगवान विष्णु ने एक अतिरिक्त मास की रचना की, जिसे पुरुषोत्तम मास कहा गया। इसी मास में भगवान ने उसका वध किया। तभी से यह मास भगवान श्रीहरि को समर्पित माना जाता है।

वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास की तिथियां

  • शुद्ध ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष: 2 मई 2026 से

  • अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष: 17 मई 2026 से

  • अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष: 1 जून 2026 से

  • शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष: 16 जून 2026 से प्रारंभ

अधिक मास में वर्जित कार्य

धर्मग्रंथों के अनुसार अधिक मास में सकाम भाव से किए जाने वाले सभी नैमित्तिक कर्म वर्जित माने गए हैं। इनमें शामिल हैं—

  • विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत

  • गृह-प्रवेश, गृहारंभ, नया व्यापार

  • नववधु प्रवेश, दीक्षा-ग्रहण

  • देव-प्रतिष्ठा, सकाम यज्ञ

  • अष्टका श्राद्ध

  • भूमि, आभूषण, वस्त्र व बहुमूल्य वस्तुओं की खरीद

अधिक मास में क्या करना चाहिए

यह मास निष्काम साधना और भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान—

  • भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण की उपासना

  • पुरुषोत्तम माहात्म्य का पाठ

  • व्रत, उपवास, जप, दान, स्नान

  • भजन, संकीर्तन और सात्त्विक जीवन

आहार-विहार के नियम

महर्षि वाल्मीकि के अनुसार पुरुषोत्तम मास में इनका सेवन शुभ माना गया है—

सेवन योग्य

  • गेहूं, चावल, मूंग, जौ, मटर

  • तिल, ककड़ी, बथुआ, कटहल, केला

  • घी, आम, जीरा, सौंठ

  • सुपारी, इमली, आंवला, सेंधा नमक

त्याज्य पदार्थ

  • उड़द, राई, प्याज, लहसुन

  • गाजर, मूली, गोभी

  • दाल, शहद, तिल का तेल

  • तामसिक भोजन, पराया अन्न

  • मसाला, तंबाकू, मदिरा

इस मास में एक समय सात्त्विक भोजन, भूमि पर शयन और निरंतर भक्ति-साधना करने का विधान है।


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