हम सभी कभी-न-कभी किसी जरूरत के लिए बैंक से लोन लेते हैं। सब कुछ ठीक चलता रहता है। लेकिन जिंदगी में कभी-कभी ऐसी मुश्किलें आ जाती हैं कि हम लोन की किस्त नहीं भर पाते हैं या समय पर लोन नहीं चुका पाते हैं। कुछ किस्त टूटते ही बैंक रिकवरी एजेंट्स के फोन आने लगते हैं। ये एजेंट्स कई बार गलत तरीके से बात करते हैं। गाली-गलौज और धमकियां देकर परेशान करते हैं। कई बार ये एजेंट्स घर के दरवाजे पर आकर बुरा बर्ताव करते हैं।
एक ओर जहां हम पहले से ही आर्थिक तनाव का सामना कर रहे होते हैं। ऐसे में इन एजेंट्स के दुर्व्यवहार से हम और परेशान हो जाते हैं। कई बार रिकवरी एजेंट्स हमारे घर, रिश्तेदारों या दोस्तों को फोन करके परेशान करते हैं, जिससे हमें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में आज हम ‘जानें अपने अधिकार’ कॉलम में जानेंगे कि-
- लोन रिकवरी एजेंट्स परेशान करें तो क्या करें?
- क्या इन एजेंट्स की शिकायत की जा सकती है?
सवाल- जब भी हम कोई लोन लेते हैं तो किन बातों का पालन करना हमारे लिए अनिवार्य है?
जवाब- अगर आपने बैंक से लोन लिया है तो कुछ जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखें। इससे आप किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी में नहीं पड़ेंगे।
समय से किस्त चुकाना- इससे आप लेट पेमेंट और अतिरिक्त ब्याज से बचे रहेंगे।
बैंक को सूचित करना- अगर आप किसी आर्थिक परेशानी में हैं तो किस्त टूटने से पहले बैंक को सूचित करें।
चेक बाउंस न होना- अगर आपने बैंक में चेक दिया हुआ है और बैंक अकाउंट में पैसे नहीं हैं तो बैंक को सूचित करें।
बैंक को रजिस्ट्री की सूचना देना (होम लोन लेने पर)- अगर घर की रजिस्ट्री हो चुकी है तो बैंक को सूचना देना।
बैंक से फॉलो–अप लेना (होम लोन लेने पर)- बिल्डर से बैंक को पेपर मिले या नहीं, इस बारे में फॉलो अप लेना।
कम्युनिकेशन क्लियर रखना- बैंक से हमेशा ईमेल, लेटर या लिखित में बातचीत करें।
सवाल- अगर किन्हीं परिस्थितिगत कारणों से लोन की किस्त समय पर नहीं भर पा रहे हैं तो क्या करें?
जवाब- अगर आप किसी कारणवश लोन समय से नहीं चुका पा रहे हैं तो धैर्य रखें। चूंकि, बैंक ने लोन देते समय क्रेडिट स्कोर, इनकम प्रूफ जैसे सारे डाक्यूमेंट्स चेक किए थे। ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस कुछ जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।
बैंक से बात करें- EMI की तारीख आने से पहले अपने बैंक से बात करें।
अपनी स्थिति स्पष्ट करें- बैंक को बताएं कि आपको क्या परेशानी आ रही है और आप EMI क्यों नहीं चुका सकते हैं।
बैंक से राहत मांगे- बैंक से किस्त टालने या लोन रिस्ट्रक्चर करने के लिए बात कर सकते हैं। इससे आपको कुछ किस्तों में राहत मिल सकती है या बैंक किस्त की रकम छोटी कर सकता है।
जरूरी डाक्यूमेंट्स साथ रखें- पिछली EMI पेमेंट्स के डाक्यूमेंट्स और लोन की डिटेल्स अपने साथ रखें।
सवाल- अगर आपने समय रहते बैंक को सूचित नहीं किया और बैंक से रिकवरी के लिए बार-बार फोन आ रहा है तो क्या करें?
जवाब- बैंक से फोन आए तो घबराएं नहीं। बात करें और उन्हें अपनी समस्या बताएं कि आप किस्त नहीं चुका सकते हैं और अभी लोन भरने की स्थिति में भी नहीं हैं।
ऐसे में आपसे पूछा जाता है कि आप कब तक पेमेंट कर सकते हैं। पेमेंट में और देरी होने पर बैंक लोन अकाउंट को रिकवरी में डाल देता है।
सवाल- अगर लोन बैंक द्वारा रिकवरी में डाल दिया गया है तो क्या करें?
जवाब- अगर बैंक ने आपके लोन को रिकवरी में डाल दिया है तो इसका मतलब है कि बैंक सामान्य प्रक्रिया के बजाय अन्य तरीकों से लोन वसूलने की कोशिश करेगा।
इसमें बैंक आपके लोन का केस रिकवरी एजेंसी को सौंप सकता है। एजेंसी के रिकवरी एजेंट्स कॉल, मैसेज या घर आकर पेमेंट की रिकवरी के लिए संपर्क करते हैं।
इस स्थिति में लोन रिकवरी एजेंट्स से बचने की बजाय उनसे शांति और समझदारी से बात करें। उन्हें बताएं कि आप लोन चुकाना चाहते हैं, लेकिन इस समय आप परेशानी में हैं।
इसके बाद आप अब भी अपने बैंक से बात कर सकते हैं। बैंक से EMI रीशेड्यूलिंग के लिए, कुछ महीनों के लिए EMI से मोहलत या लोन सेटलमेंट के लिए बात कर सकते हैं।
सवाल- लोन रिकवरी एजेंट्स परेशान करें तो क्या करना चाहिए?
जवाब- अगर रिकवरी एजेंट्स आपको परेशान कर रहे हैं तो सबसे पहले आप उनसे बात करें। उन्हें शांतिपूर्वक बताएं कि उनका तरीका RBI की गाइडलाइंस के खिलाफ है।
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