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लखनऊ: बजट सत्र के आखिरी दिन सीएम योगी का जातीय राजनीति पर प्रहार, दिनकर की पंक्तियां पढ़ीं

Bolta Sach News
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Lucknow Last day of the budget session

बोलता सच,लखनऊ.: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने जातिवादी राजनीति पर तीखा हमला बोला और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां उद्धृत करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।

योजनाओं का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी समाज को जाति के आधार पर बांटकर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि शासन की सुविधाएं प्रदेश के हर नागरिक का अधिकार हैं और कानून की नजर में सभी समान होने चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव सभी तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह समाज को जाति के आधार पर बांटने की राजनीति करता रहा है। सीएम ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों के बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

दिनकर की पंक्तियों से विपक्ष पर तंज

सदन में सीएम योगी ने दिनकर की चर्चित पंक्तियां पढ़ीं—

“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता है रणधीरों का,
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
‘जाति-जाति’ का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।”

इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने जातीय राजनीति पर सीधा प्रहार किया। उनका संकेत स्पष्ट रूप से विपक्ष, खासकर अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) राजनीति की ओर माना जा रहा है, जिसे लोकसभा चुनाव 2024 के बाद और तेज किया गया है।

नेता प्रतिपक्ष पर भी टिप्पणी

सीएम योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का नाम लेते हुए कहा कि यदि पूर्व सरकारों ने गरीब ब्राह्मण बच्चों को समय पर छात्रवृत्ति दी होती तो उनका भी भला हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की राजनीति केवल जातिगत समीकरणों तक सीमित रही है।

‘रश्मिरथी’ के संदर्भ में जातिवाद पर प्रहार

राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी में महाभारत के कर्ण प्रसंग के माध्यम से जातिवाद पर तीखा प्रहार किया था। कर्ण के संवादों के जरिए उन्होंने बताया कि प्रतिभा का मूल्य जन्म से नहीं, कर्म और पराक्रम से होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री का यह बयान चुनावी विमर्श की दिशा तय करने वाला हो सकता है। जातीय समीकरणों के बीच विकास और समानता के मुद्दे को केंद्र में लाने की रणनीति के रूप में इसे देखा जा रहा है।

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