मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एसआईआर के जरिए खास समुदायों के मताधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। ममता बनर्जी ने साफ चेतावनी दी कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जो पार्षद और पार्टी कार्यकर्ता निष्क्रिय पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बूथ स्तर के एजेंटों (बीएलए) को सतर्क रहने और हर मतदाता के अधिकारों की रक्षा करने का निर्देश दिया।
मटुआ समुदाय को निशाना बनाने का आरोप
ममता बनर्जी ने भाजपा पर मटुआ समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम काटकर भाजपा चुनाव जीतने की साजिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश में लगी है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए गए माइक्रो ऑब्जर्वरों पर भी सवाल उठाए। ममता ने कहा कि बाहर से भेजे गए ये अधिकारी न तो स्थानीय भाषा जानते हैं और न ही बंगाल की परिस्थितियों को समझते हैं, जिससे आम मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बर्दवान समेत कई इलाकों में बाहर के राज्यों, खासकर बिहार से मोटरसाइकिलें लाई जा रही हैं और चुनाव के दौरान बाहरी लोगों को सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर सभी बीएलए को स्थानीय विधायक, पार्षद और ब्लॉक अध्यक्षों से समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।
‘लोकतंत्र बचाने की लड़ाई’
ममता बनर्जी ने कहा कि यह केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग बंगाल सरकार को जानकारी दिए बिना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर रहा है और भाजपा के हित साध रहा है। ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा बंगाल में मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की साजिशों को केवल टीएमसी के कार्यकर्ता ही नाकाम कर सकते हैं और इसके लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।