बोलता सच,कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को मुरीगंगा नदी पर बनने वाले चार लेन के बहुप्रतीक्षित ‘गंगासागर सेतु’ की आधारशिला रखेंगी। यह सेतु मुख्य भूभाग को सागर द्वीप से जोड़ेगा, जहां हर वर्ष विश्व प्रसिद्ध गंगासागर मेला आयोजित होता है। पुल के निर्माण से श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल लगभग 4.75 किलोमीटर लंबा होगा और इसका डिजाइन विद्यासागर सेतु से मिलता-जुलता होगा। अभी तक गंगासागर जाने के लिए यात्रियों को फेरी और नाव सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, विशेषकर मेले के दौरान। पुल बनने के बाद साल भर निर्बाध सड़क संपर्क संभव हो सकेगा।
जमीन अधिग्रहण और निर्माण अवधि
पुल के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने लगभग 12.97 एकड़ भूमि खरीदी है। इसमें काकद्वीप क्षेत्र में 7.95 एकड़ और कचुबेरिया क्षेत्र में 5.01 एकड़ जमीन शामिल है। परियोजना का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है और इसके अगले चार वर्षों में पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह सेतु केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित होगा। सागर द्वीप से मुख्य भूमि तक कृषि उत्पादों, फल-सब्जियों और अन्य सामानों की ढुलाई आसान होगी। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यटन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने दौरे के दौरान गंगासागर मेले की तैयारियों की भी समीक्षा करेंगी। वे कपिल मुनि मंदिर और भारत सेवाश्रम संघ जाने की संभावना भी है। मुख्यमंत्री लंबे समय से गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करने की मांग करती रही हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर होने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम
प्रशासन ने मकर संक्रांति के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े इंतजाम किए हैं। सुचारू संचालन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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