बोलता सच,अध्यात्म : मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है और इस दिन व्रत व पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस अवसर पर चंद्र देव की उपासना भी की जाती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा या बत्तीसी पूनम के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि इस वर्ष यह व्रत 4 दिसंबर को रखा जाएगा या 5 दिसंबर को। आइए जानते हैं तिथि, महत्व और पूजा विधि।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है—4 या 5 दिसंबर 2025?
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर की सुबह 8:38 बजे शुरू होगी और 5 दिसंबर की शाम 4:44 बजे समाप्त होगी। शास्त्रीय नियमों के हिसाब से जिस दिन शाम के समय पूर्णिमा तिथि हो, उसी दिन व्रत रखना श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत 4 दिसंबर को रखा जाएगा।
इस दिन पूर्णिमा के साथ भद्रा भी लगेगी, जो शाम 6:41 बजे तक रहेगी। हालांकि भद्रा के दौरान पूजा-पाठ पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, इसलिए भक्त शांतिपूर्वक अपनी पूजा कर सकते हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा विधि
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पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
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पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए ‘ओम नमो नारायण’ मंत्र के साथ पूजन शुरू करें।
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लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर सत्यनारायण भगवान की प्रतिमा स्थापित करें और विधि-विधान से पूजा करें।
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सत्यनारायण कथा का पाठ करें तथा कसार और चरणामृत का भोग लगाकर अंत में प्रसाद वितरित करें।
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