Breaking News

लखनऊ की मायावती कॉलोनी में सीवर और दूषित पानी का संकट, 200 परिवारों की जिंदगी नरक बनी

Bolta Sach News
|
Mayawati Colony of Lucknow
बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित दीनदयाल पुरम मायावती कॉलोनी के हालात बीते कई वर्षों से लगातार बदतर होते जा रहे हैं। कॉलोनी के करीब 200 घरों में रहने वाले लगभग एक हजार लोग सीवर ओवरफ्लो और दूषित पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई परिवार मजबूरी में अपने घर छोड़कर गांवों की ओर पलायन कर चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर का गंदा पानी सड़कों से बहता हुआ घरों के कमरों, किचन और बाथरूम तक भर जाता है। शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं रहते और नलों से बदबूदार, सीवर मिला पानी आता है। इसी पानी को पीने को मजबूर लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं।
स्थानीय निवासी रीना ने बताया कि करीब दो साल पहले कॉलोनी में गंभीर महामारी फैली थी, जिसमें लगभग 200 घरों के लोग एक साथ बीमार हो गए थे। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। इसके बावजूद आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है और आज भी लगभग हर घर में कोई न कोई बीमारी से जूझ रहा है।
समस्या से नाराज कॉलोनीवासियों ने रविवार को प्रदर्शन किया और ‘नो रोड नो वोट’ के नारे लगाए। स्थानीय निवासी विश्वनाथ का कहना है कि पीने के पानी की पाइपलाइन को सीवर लाइन से जोड़ दिया गया है, जिससे पानी हमेशा दूषित रहता है। गंदा पानी पीने से वे पिछले 15 दिनों से बीमार हैं और उनका पूरा परिवार बिस्तर पर है, लेकिन नगर निगम और जलकल विभाग की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही।
वहीं शरीफ ने बताया कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा दवाइयों, इलाज और बाहर से साफ पानी खरीदने में खर्च हो जाता है। बच्चों की स्कूल फीस तक कर्ज लेकर चुकानी पड़ रही है। बच्चे रोज घर छोड़ने की बात करते हैं, लेकिन जाएं तो कहां जाएं।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि शिकायत और प्रदर्शन के बाद नगर निगम की गाड़ी आती है, थोड़ी-बहुत सफाई कर चली जाती है और कुछ ही दिनों में समस्या फिर जस की तस हो जाती है। स्थायी समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिए जाते हैं।
स्थानीय महिला शशि कला ने बताया कि डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। गंदगी के कारण सामाजिक कार्यक्रमों में मेहमानों का आना-जाना भी कम हो गया है। वहीं अशोक कुमार ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय ही जनप्रतिनिधि दिखाई देते हैं, उसके बाद कोई सुध लेने नहीं आता। टैक्स और बिल वसूलने सभी विभाग पहुंच जाते हैं, लेकिन विकास के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता।

इसको भी पढ़ें : आई-पैक पर ईडी की छापेमारी से सियासी घमासान, सुप्रीम कोर्ट पहुंची जांच एजेंसी

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Reply