बोलता सच न्यूज़ : शहर के प्रसिद्ध मनोकामना पूर्ण हनुमान मंदिर की ज़मीन को लेकर चल रहा विवाद शुक्रवार को उस समय और गहरा गया जब राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में मंदिर परिसर की जमीन की पैमाइश की। पैमाइश के दौरान मंदिर के सरोवर से लेकर राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम के आवास की पिछली दीवार तक का क्षेत्र “बचत की जमीन” (सरकारी भूमि) पाया गया। पैमाइश के बाद अधिकारियों ने दोनों पक्षों की सीमा स्पष्ट करने के लिए चूने से निशान लगाए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि न तो मंदिर के महंत का दावा पूरी तरह सही है और न ही मंत्री का। संबंधित भूमि पर बनी चहारदीवारी और गेट को कोर्ट के आदेश के बाद हटाया जाएगा।
विवाद की जड़
मामला तब शुरू हुआ जब मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास ने आरोप लगाया कि राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने मंदिर की ज़मीन पर अतिक्रमण किया है। महंत का दावा है कि मंदिर की भूमि गाटा संख्या 2905 और 2906 में दर्ज है, जबकि मंत्री द्वारा खरीदी गई भूमि गाटा संख्या 2904 की मात्र साढ़े सात डिसमिल है।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, गाटा संख्या 2904 की कुल भूमि 23 डिसमिल है, जिसमें कई व्यक्तियों की हिस्सेदारी है। 13 मई 2025 को मंत्री ने इस भूमि का रजिस्ट्री कराई, जिस पर ₹33 लाख से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी भी अदा की गई थी।
इस भूमि की सीमाएं:
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पूर्व: मंदिर का पोखरा (गाटा संख्या 2906)
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पश्चिम: संकरी सड़क
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उत्तर: अन्य लोगों के मकान
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दक्षिण: स्थानीय निवासियों की ज़मीन
कैसे भड़का विवाद?
विवाद तब और बढ़ गया जब मंत्री की ओर से चहारदीवारी और फिर गेट का निर्माण शुरू हुआ। मंदिर पक्ष ने इसका विरोध किया, जिससे तनाव बढ़ गया। प्रशासन ने गेट को सील कर दिया और इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने दोनों पक्षों से संबंधित दस्तावेज तलब कर जांच शुरू कर दी है। अब कोर्ट के आदेश का इंतजार है, जिसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि विवादित भूमि पर कौन-सा पक्ष दावा कर सकता है। फिलहाल, विवादित भूमि को राजस्व अभिलेखों में सरकारी बचत ज़मीन के रूप में चिह्नित किया गया है।
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