बोलता सच : महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर आगामी निकाय चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि अंतिम क्षण में चुनाव टालना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, जिन्होंने नामांकन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
पैठण में मीडिया से बातचीत के दौरान फडणवीस ने कहा कि विचाराधीन याचिकाओं के आधार पर चुनाव स्थगित करना गलत और अनुचित है। उन्होंने निर्णय की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा—
“मुझे नहीं पता कि आयोग किससे सलाह ले रहा है, लेकिन मेरी जानकारी में किसी अदालत में याचिका दायर होने मात्र से चुनाव स्थगित नहीं किए जा सकते।”
राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को होने वाले निकाय चुनाव कुछ क्षेत्रों में स्थगित कर दिए हैं।
चुनाव आयोग के सामने मामला उठाने की तैयारी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हुआ है और वह अदालत गया है, तो पूरे चुनाव को रोक देना अन्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन है।
उन्होंने स्पष्ट कहा—
“निर्वाचन आयोग स्वतंत्र संस्था है, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह गलत है। हम यह मामला आयोग के सामने रखेंगे।”
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी आयोग के फैसले को असामान्य बताते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चुनाव स्थगित किए जाने की मिसाल पहले नहीं मिलती।
शहरी विकास पर पिछली सरकारों की उपेक्षा का आरोप
एक अन्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस ने दावा किया कि पूर्व की सरकारों ने शहरों के विकास को नजरअंदाज किया, जबकि देश की जीडीपी का 65% हिस्सा शहरी क्षेत्रों से आता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही शहरी विकास के लिए योजनाएं शुरू कीं।
फडणवीस ने कहा—
“पिछले 65 वर्षों तक शहरों के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी, इसी वजह से झुग्गियां, अतिक्रमण, पानी और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं खड़ी हुईं।”
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