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NCSC चलाएगा देशव्यापी अभियान, ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी SC आरक्षण लेने वालों की होगी जांच

Bolta Sach News
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NCSC will run a nationwide campaign

बोलता सच,नई दिल्ली: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) उन व्यक्तियों का पता लगाने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू करने जा रहा है, जो ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। संविधान के अनुसार, SC आरक्षण केवल हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय से संबंधित लोगों को ही मिलता है। कई राज्यों से ऐसी शिकायतें मिलने के बाद आयोग ने इस दिशा में व्यापक कार्रवाई की तैयारी की है। आरोप है कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के बावजूद SC श्रेणी का लाभ उठा रहे हैं।


आरक्षण के दुरुपयोग पर सख्त रुख

Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग सभी राज्यों को पत्र लिखकर सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों में जाति प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच करने को कह रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह उन व्यक्तियों पर कार्रवाई करे जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद SC आरक्षण लिया है।


धर्म परिवर्तन के बाद SC आरक्षण का अधिकार खत्म

संविधान के आर्टिकल 341 के तहत राष्ट्रपति के 1950 के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति की श्रेणी में केवल वही लोग आते हैं जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अनुयायी हों। इसलिए कोई भी व्यक्ति जो ईसाई धर्म अपना चुका है, SC आरक्षण पाने का हकदार नहीं माना जाएगा। आयोग को ऐसी शिकायतें भी मिली हैं कि कुछ लोग लाभ पाने के उद्देश्य से दोबारा हिंदू धर्म अपना लेकर SC श्रेणी का दावा कर रहे हैं।


राज्यों के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम तैयार करेगा NCSC

NCSC के चेयरमैन किशोर मकवाना ने बताया कि विभिन्न राज्यों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
उन्होंने कहा—
“हम राज्य सरकारों से रिकॉर्ड की गहन पड़ताल करने और धर्म बदलने के बाद भी आरक्षण लेने वालों की पहचान करने के लिए कह रहे हैं। हमारा लक्ष्य एक स्थायी रिपोर्टिंग सिस्टम बनाना है, ताकि राज्यों से नियमित रूप से ऐसे मामलों की जानकारी मिल सके और गलत लाभ लेने वालों पर रोक लगाई जा सके।”


सुप्रीम कोर्ट भी पूर्व में दे चुका है सख्त टिप्पणी

2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश को बरकरार रखते हुए उस महिला का दावा खारिज कर दिया था, जिसने आरक्षण पाने के लिए ईसाई से हिंदू बनने का दावा किया था। अदालत ने कहा था कि केवल आरक्षण का लाभ लेने के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन “संविधान के साथ धोखाधड़ी” है।


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