बोलता सच,पटना : बिजेन्द्र प्रसाद यादव को नीतीश कुमार की कैबिनेट का बेस्ट परफॉर्मर मंत्री माना जाता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि 80 वर्ष की उम्र में उन्हें न सिर्फ मंत्रिपरिषद में जगह क्यों दी गई, बल्कि उनके कंधों पर एक साथ पांच विभागों की जिम्मेदारी भी क्यों सौंपी गई। इसका जवाब साफ है—उनकी योग्यता और अनुभव उम्र पर भारी पड़ते हैं। यही कारण है कि बढ़ती उम्र के बावजूद नीतीश कुमार उन्हें लगातार मंत्री बनाते रहे हैं।
बिजेन्द्र प्रसाद यादव एक तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक और प्रशासनिक जरूरत बन चुके हैं। उनकी सोच नीतीश कुमार से काफी मेल खाती है। वे भी समावेशी विकास और भ्रष्टाचार मुक्त शासन में विश्वास रखते हैं। ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने बिहार में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था कर राज्य की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई।
नीतीश कुमार के भरोसेमंद सलाहकार
बिजेन्द्र प्रसाद यादव जदयू के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिनसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियमित सलाह लेते हैं। वे सुपौल से लगातार नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं, जो उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को भी नजदीक से देखा है और नीतीश राज में किस तरह का प्रशासन चाहिए, यह उन्हें अच्छी तरह मालूम है।
वे जाति की राजनीति से ऊपर उठकर मूल्यों की राजनीति करते हैं। यही वजह है कि वे लालू यादव की बजाय नीतीश कुमार के साथ खड़े नजर आते हैं। जदयू के सबसे बड़े यादव चेहरे के रूप में उनकी पहचान है। प्रशासनिक हो या राजनीतिक मामला, नीतीश कुमार उन पर पूरा भरोसा करते हैं। सीट बंटवारे जैसे अहम फैसलों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। वे भाजपा पर तर्कसंगत दबाव बनाकर नीतीश कुमार का काम आसान करते हैं। भाजपा भी उनके अनुभव और योग्यता का सम्मान करती है, यही कारण है कि जदयू से तल्खी के दौर में भी भाजपा ने कभी उनके खिलाफ बयानबाजी नहीं की।
बिना महत्वाकांक्षा के प्रभावशाली नेता
इतना प्रभावशाली नेता होने के बावजूद बिजेन्द्र प्रसाद यादव में कोई निजी महत्वाकांक्षा नहीं दिखती। वे जदयू की गुटीय राजनीति से दूर रहते हैं और नियम व अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं। नीतीश कुमार को भरोसा रहता है कि उन्हें जो भी विभाग सौंपा जाएगा, उसका प्रदर्शन बेहतर ही रहेगा।
2014 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे के समय उन्हें वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने कुशलता से संभाला। आबकारी और मद्य निषेध मंत्री के रूप में भी उनका प्रदर्शन प्रभावी रहा। जल संसाधन मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल सराहनीय माना जाता है।
दिखावे से दूर, साफ छवि की राजनीति
बिजेन्द्र प्रसाद यादव दिखावे की राजनीति से दूर रहते हैं। वे किसी को खुश करने के लिए फैसले नहीं लेते, बल्कि जो सही लगता है वही करते हैं। अक्टूबर 2018 में कटिहार में हुई तालिमी बेदारी कांफ्रेंस के दौरान जब उन्हें मंच पर नमाजी टोपी पहनाने की कोशिश की गई, तो उन्होंने उसे पहनने के बजाय हाथ में रख लिया और बाद में पीछे बैठे व्यक्ति को दे दिया। इस घटना पर राजद नेता शिवानंद तिवारी ने उनकी आलोचना की थी, लेकिन इसका उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा।
2020 के विधानसभा चुनाव में वे सुपौल से करीब 28 हजार वोटों से जीते, जबकि 2025 के चुनाव में उन्होंने लगभग 30 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह साबित करता है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता मजबूत बनी हुई है।
कुल मिलाकर, बिजेन्द्र प्रसाद यादव नीतीश कैबिनेट में उम्र से नहीं, बल्कि अनुभव, ईमानदारी और प्रदर्शन से अपनी जगह बनाए हुए हैं।
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