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यूजीसी गाइडलाइन विवाद पर चंद्रशेखर बोले—विरोध करने वालों ने पढ़ी ही नहीं गाइडलाइन

Bolta Sach News
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On UGC guideline controversy
बोलता सच,लखनऊ। आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर ने यूजीसी गाइडलाइन को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इसका विरोध क्यों हो रहा है। उनके मुताबिक, विरोध करने वालों में से करीब 90 प्रतिशत लोगों ने गाइडलाइन को पढ़ा ही नहीं है।
मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी होने का दर्द वही समझ सकता है जो खुद इन वर्गों से आता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गाइडलाइन एससी, एसटी, ओबीसी समुदाय ने नहीं, बल्कि एक समिति ने तैयार की है। समिति ने उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते अपराधों—जिसमें 118 प्रतिशत तक की वृद्धि बताई गई है—के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई है।

उन्होंने कहा कि इस गाइडलाइन में केवल एससी-एसटी ही नहीं, बल्कि ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और दिव्यांगजनों को भी शामिल किया गया है। चंद्रशेखर के अनुसार, जब EWS के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को भी जोड़ा गया है और उन्हें 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, तो फिर विरोध का औचित्य समझ से परे है।
सरकार के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं, उसे लागू करना ज्यादा अहम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत सात साल से कम सजा वाले मामलों में आज भी पुलिस गिरफ्तारी नहीं करती।
उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी विभागों में सामाजिक न्याय की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 45 कुलपतियों में से केवल 7 ही एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग से हैं। वहीं ओबीसी के 80 प्रतिशत, एसटी के 83 प्रतिशत और एससी के 64 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।
चंद्रशेखर ने कहा कि जाति आज भी भारत की सच्चाई है। गरीबी एक बड़ा दर्द है, लेकिन जाति भी उतना ही बड़ा सच है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी ऑनर किलिंग, सामाजिक बहिष्कार और अपमानजनक टिप्पणियां होती हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हो रहा विरोध बेवजह है। कुछ सामान्य वर्ग के अधिकारियों के इस्तीफों पर उन्होंने कहा कि इससे साफ हो रहा है कि कौन किसके साथ खड़ा है। साथ ही उन्होंने इसे प्रयागराज की घटना से ध्यान भटकाने की कोशिश बताते हुए इस विषय पर खुली बहस का स्वागत किया।

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