बोलता सच,नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को अजमेर शरीफ दरगाह में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर परंपरागत चादर चढ़ाई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की वैकेशन बेंच में एक याचिका दायर कर प्रधानमंत्री की ओर से चादर चढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की वैकेशन बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता ने अर्जेंट सुनवाई का अनुरोध किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि संकट मोचन मंदिर से जुड़ी उनकी याचिका अभी लंबित है और इसी आधार पर पीएम मोदी की ओर से अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने पर रोक लगाई जानी चाहिए। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा, “आज इस मामले की लिस्टिंग नहीं होगी।”
यह याचिका उस समय दाखिल की गई, जब किरेन रिजिजू 814वें वार्षिक उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ पहुंचने वाले थे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा भी इसका पालन किया जाता रहा है।
दरगाह में चादर चढ़ाने के बाद किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं जब भी यहां आता हूं, मुझे शांति का अनुभव होता है। भारत सरकार की ओर से हमने देश में अमन-चैन और राष्ट्र की बेहतरी के लिए दुआ मांगी है। यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”
उधर, प्रधानमंत्री की ओर से चादर चढ़ाने पर रोक लगाने को लेकर अजमेर की एक अदालत में भी याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका हिंदू सेना के तत्कालीन अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह कथित तौर पर एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि विवादित ढांचे के लिए चादर भेजने से न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर असर पड़ता है।
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