बोलता सच,मुंबई : महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव को लेकर मुंबई की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने महाराष्ट्र में ‘उद्धव ठाकरे’ के नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ उठाया और अब बीएमसी चुनाव में अकेले उतरने का फैसला कर शिवसेना-यूबीटी की पीठ में छुरा घोंप दिया है।
आनंद दुबे ने कहा कि 2019 से पहले कांग्रेस राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुकी थी और शिवसेना-यूबीटी ने ही उसे अपने साथ लेकर सहारा दिया। इसके बावजूद कांग्रेस ने शिवसेना-यूबीटी का नाम और पहचान छीनने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुंबई में भाजपा की बी-टीम की तरह काम कर रही है। जब कांग्रेस जानती है कि बीएमसी चुनाव बेहद अहम हैं, तो फिर वह अकेले चुनाव लड़ने का फैसला क्यों कर रही है, यह समझ से परे है।
शिवसेना-यूबीटी प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस मुंबई में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी और सिंगल डिजिट सीटों तक सिमट जाएगी। उन्होंने कहा कि बीएमसी सहित पूरे महाराष्ट्र में 28 नगर निगमों के चुनाव होने हैं, लेकिन कांग्रेस को एक-दो सीटों से ज्यादा कहीं सफलता नहीं मिलेगी, क्योंकि मुंबई में उसकी कोई मजबूत जमीनी पकड़ नहीं है।
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के ‘बुर्का वाली मेयर’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम विवाद खड़ा करना वारिस पठान की पुरानी आदत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें बुर्का वाली या पठान-खान मेयर बनानी है तो उन्हें पड़ोसी देशों में चले जाना चाहिए। दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि वारिस पठान भाजपा की बी-टीम की तरह काम करते हैं और ऐसे समय में दिया गया उनका बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ही मुख्य ताकत बनकर उभरेगी और शहर को हिंदू और मराठी मेयर मिलेगा।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा आरएसएस की तारीफ पर भी आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आरएसएस से उसके अनुशासन, संगठनात्मक क्षमता और मातृभूमि के प्रति समर्पण की सीख लेनी चाहिए। दुबे के मुताबिक, आरएसएस देशभर में 60-70 लाख से अधिक स्वयंसेवकों के जरिए सेवा कार्य कर रहा है। भले ही वह सीधे राजनीति में शामिल न हो, लेकिन पर्दे के पीछे राजनीतिक दलों को समर्थन देता है। उन्होंने आरएसएस को देश की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक सांस्कृतिक और संस्कारी संगठन बताया और कहा कि अगर कांग्रेस ऐसे संगठन से भी नहीं सीखेगी, तो फिर वह किससे सीखेगी।
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