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बिहार की राजनीति में प्रियंका गांधी की एंट्री: कांग्रेस के लिए संजीवनी या बड़ी चुनौती?

Bolta Sach News
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Priyanka Gandhi in Bihar politics
बोलता सच,पटनाः यदि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रिय एंट्री बिहार की राजनीति में होती है, तो यह बिहार कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी में कमी आना और संगठन को नई ऊर्जा मिलना माना जा रहा है। साथ ही, कांग्रेस की युवा शक्ति को एक स्पष्ट दिशा और नेतृत्व मिलने की संभावना भी बनेगी।
हालांकि यह राह आसान नहीं होगी। प्रियंका गांधी को बिहार में भाजपा के मजबूत और संगठित ढांचे के मुकाबले कांग्रेस संगठन को खड़ा करना होगा। चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन संभावनाएं भी कम नहीं हैं—खासतौर पर ऐसे समय में जब राजद आंतरिक विरोधाभासों और आपसी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में प्रियंका गांधी को तात्कालिक राजनीति से ऊपर उठकर लंबी पारी की रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।
आधी आबादी पर हो सकता है फोकस
बिहार की आधी आबादी यानी महिलाएं पिछले कुछ चुनावों में नीतीश कुमार की राजनीति का मजबूत आधार रही हैं। महिलाओं के आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण को लेकर नीतीश सरकार की योजनाओं ने उन्हें बड़ा राजनीतिक समर्थन दिलाया। अब जब नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने की चर्चा है, ऐसे में इस वर्ग पर कांग्रेस की नजर टिक सकती है। इंदिरा गांधी की ‘आयरन लेडी’ छवि से जोड़े जाने के कारण प्रियंका गांधी महिलाओं के बीच अपनी मजबूत पैठ बना सकती हैं और कांग्रेस के आधार को सुदृढ़ कर सकती हैं।
मुस्लिम और दलित वोटों की पुनर्बहाली की कोशिश
कांग्रेस के कमजोर होने के बाद मुस्लिम और दलित वोटों का बड़ा हिस्सा राजद की ओर शिफ्ट हुआ। लेकिन 2025 के चुनावी माहौल में मुस्लिम मतदाताओं में राजद के प्रति पहले जैसी आक्रामकता नहीं दिख रही है। एआईएमआईएम इस वर्ग में तेजी से प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में प्रियंका गांधी, अपने पारंपरिक आधार वोट को फिर से साधकर कांग्रेस को नई मजबूती दे सकती हैं। इसके लिए कांग्रेस को राजद से अलग अपनी स्वतंत्र और स्पष्ट राजनीतिक पहचान गढ़नी होगी।
युवा मतदाता बन सकते हैं गेमचेंजर
प्रियंका गांधी का प्रभाव राज्य के युवा मतदाताओं पर भी पड़ सकता है। बिहार में कुल 7 करोड़ 43 लाख से अधिक मतदाताओं में करीब 1 करोड़ 77 लाख युवा मतदाता हैं। इनमें 25 वर्ष से कम आयु की आबादी लगभग 58 प्रतिशत है। यह युवा वर्ग बदलाव और नए नेतृत्व की तलाश में है। यदि कांग्रेस नीतिगत स्पष्टता के साथ इस वर्ग को साधने में सफल होती है और प्रियंका गांधी का नेतृत्व उसे दिशा देता है, तो बिहार की चुनावी फिजा में निश्चित रूप से बदलाव देखने को मिल सकता है।

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