दरअसल, बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि उन्हें सदन में किसी अप्रिय घटना की आशंका की सूचना मिली थी। हालात को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे उस समय सदन में न आएं। स्पीकर के अनुसार, उनके आग्रह पर प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए।
रामगोपाल यादव का बयान
जब रामगोपाल यादव से इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “संसद बोलने, बहस करने और सवाल उठाने के लिए होती है।” वहीं जब उनसे यह पूछा गया कि क्या महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गई थीं, तो उन्होंने कहा, “अगर यह सही है, तो ऐसा नहीं होना चाहिए।”
स्पीकर ओम बिरला का खुलासा
गुरुवार को इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में कहा, “देश ने देखा कि कल सदन में क्या हुआ। सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए थे। मुझे सूचना मिली कि कुछ भी हो सकता है। ऐसे हालात न बनें, इसके लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे सदन में न आएं।”
प्रियंका गांधी का पलटवार
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने स्पीकर के बयान पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं। प्रियंका के मुताबिक, “कल प्रधानमंत्री सदन में आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, क्योंकि तीन महिला सांसद बेंच के सामने खड़ी थीं।” उन्होंने सरकार पर बहस से बचने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, प्रियंका गांधी के दावे के विपरीत, रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास तीन नहीं, बल्कि छह कांग्रेसी महिला सांसद मौजूद थीं। इनमें आर. सुधा, ज्योतिमणि, वर्षा गायकवाड़, गेनीबेन ठाकोर, के. काव्या और शोभा बच्छाव शामिल बताई गई हैं।
पीएम मोदी क्यों नहीं दे पाए जवाब
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शाम करीब पांच बजे लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई बहस के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना जवाब देना था। लेकिन सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और विपक्ष-सरकार के टकराव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।