बोलता सच : पटियाला हाउस स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायालय ने आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश की उस याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसमें उसने एनआईए मुख्यालय में रिमांड अवधि के दौरान अपने वकील से वैकल्पिक दिनों पर मिलने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की दलीलों पर विचार किया और सीमित दायरे में मुलाकात की इजाज़त प्रदान की।
17 नवंबर को श्रीनगर से गिरफ्तार किए गए जासिर बिलाल को 18 नवंबर को 10 दिन की एनआईए हिरासत में भेजा गया था। एनआईए के मुताबिक, बिलाल एक सक्रिय आतंकी मॉड्यूल में शामिल था और सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी का करीबी सहयोगी था। एजेंसी का आरोप है कि आरोपी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता देता था, जिसमें ड्रोन मॉडिफिकेशन, रॉकेट निर्माण और हमले की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य शामिल थे।
हाईकोर्ट ने याचिका की मुख्य मांग खारिज की
इससे पहले, आरोपी बिलाल द्वारा दायर याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। बिलाल ने एनआईए मुख्यालय में अपने वकील से मुलाकात की अनुमति मांगी थी, जिसे न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने सख्त शब्दों में अस्वीकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि अदालत किसी एक आरोपी के लिए कानूनी प्रक्रिया में बदलाव नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति शर्मा ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह ट्रायल कोर्ट के मौखिक आदेश पर कैसे भरोसा करने की अपेक्षा करता है, जबकि ऐसा कोई लिखित आदेश रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
कोर्ट ने कहा, “तुम कोई खास नहीं हो। हम किसी एक व्यक्ति के लिए प्रक्रिया नहीं बदल सकते। हर कोई आकर कह सकता है कि आदेश मौखिक रूप से खारिज हुआ, लेकिन हम रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आधार पर ही निर्णय लेते हैं।”
ट्रायल कोर्ट को मामले पर निर्णय करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से इनकार करते हुए आरोपी की वैकल्पिक मांग को स्वीकार किया और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले पर कानून के अनुसार विचार करे और अपना आदेश पारित करे। इस निर्देश के बाद मामला अब पटियाला हाउस कोर्ट के सेशन जज के समक्ष लंबित है, जिस पर शनिवार को सुनवाई निर्धारित है।
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