बोलता सच,नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल राष्ट्रध्वज और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन नहीं है, बल्कि यह भारत के प्राचीन और शाश्वत आध्यात्मिक सार की रक्षा और संवर्धन की प्रतिबद्धता को दोहराने का भी अवसर है। उन्होंने यह बात सोमवार को दिल्ली स्थित आरएसएस कार्यालय में राष्ट्रध्वज फहराने के बाद आयोजित कार्यक्रम में कही।
होसबाले ने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भारत के शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएं, नागरिक कर्तव्यों का पालन करें और राष्ट्रीय कर्तव्य के अनुरूप आचरण करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि संविधान और तिरंगे की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का सर्वोच्च राष्ट्रीय कर्तव्य है, क्योंकि इनकी नींव सत्य और धर्म पर आधारित है।
गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम्’ बजाने का निर्णय सराहनीय
कार्यक्रम के दौरान होसबाले ने गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम्’ बजाने के सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रीय गीत है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को प्रेरित किया। इसकी हर पंक्ति और हर शब्द आने वाली पीढ़ियों के लिए भी देश सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर पर इसे सभी को स्मरण कराने का निर्णय प्रशंसनीय है।
जीवंत गणराज्य के नागरिक होने पर गर्व
केशव कुंज में आयोजित कार्यक्रम में होसबाले ने कहा कि भारतीयों को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि वे एक गौरवशाली और जीवंत गणराज्य के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस भारत की एकता, अखंडता और सीमाओं की सुरक्षा के संकल्प को मजबूत करने का दिन है। उन्होंने लोगों से समाज के प्रति प्रेम और करुणा तथा कमजोर वर्ग के प्रति स्नेह और सहानुभूति विकसित करने की अपील की।
कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण का आह्वान
होसबाले ने कहा कि भारतीय सेना, सुरक्षा बल, पुलिस और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं ‘कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण’ के साथ देश की रक्षा और प्राचीन विरासत के संरक्षण में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि भारत के हर क्षेत्र और हर आयाम के विकास के लिए निरंतर प्रयास करना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से इस साधना में लगे हैं—गणराज्य की रक्षा करना, समाज की सेवा करना और भारत के ‘राष्ट्र धर्म’ से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना।
इसको भी पढ़ें : देवरिया में उत्तर प्रदेश दिवस पर सरस मेले का शुभारंभ, ग्रामीण उत्पाद और योजनाएं बनीं आकर्षण का केंद्र
➤ You May Also Like






















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































