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आरएस सांसद वसीम अहमद के डेथ सर्टिफिकेट में बड़ा फर्जीवाड़ा, नगर निगम की भूमिका भी संदेह के घेरे में

Bolta Sach News
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RS MP Waseem Ahmed
बोलता सच : पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के बेहद करीबी और पूर्व राज्यसभा सदस्य स्व. वसीम अहमद का अलीगढ़ में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार हो गया। इस मामले में उनकी पत्नी और साले पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। शिकायत के आधार पर नगर निगम ने जांच शुरू कर दी, जबकि प्रारंभिक स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने पर पुलिस ने पत्नी और साले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में यह रिपोर्ट नगला रोड, दोदपुर स्थित उमर अपार्टमेंट के भाजपा नेता सैय्यद अशहर इस्लाम राजा द्वारा दर्ज कराई गई है।
राजा ने बताया कि उनके मामा, पूर्व सांसद वसीम अहमद का लगभग 70 वर्ष की आयु में 26 अप्रैल 2021 को कोविड काल के दौरान सिविल लाइंस स्थित घर पर हृदयाघात से निधन हो गया था। इससे पहले जून 2014 में उन्होंने दिल्ली के अबुल फजल एंकलेव, शाहीन बाग निवासी और सऊदी अरब के जेद्दा में शिक्षिका फराह बानो से 65 वर्ष की आयु में निकाह किया था। हालांकि शादी के बाद ही उन्हें अहसास हो गया था कि फराह उनकी संपत्ति, नाम और शोहरत के लिए निकाह को राजी हुई हैं।
निकाह के बाद वे दो माह तक फराह के साथ सऊदी अरब में रहे, लेकिन वहां भी सांसद सेवा या बैंक खातों में फराह का नाम नहीं जोड़ा। हां, निकाहनामा के आधार पर पासपोर्ट और आधार कार्ड में फराह का नाम दर्ज हो गया था। भारत लौटने के बाद वसीम अहमद अपने भाई नसीम अहमद के साथ अलीगढ़ रहने लगे और शरीयत के अनुसार फराह को तलाक दे दिया। मामा की मृत्यु के बाद भी फराह कभी अलीगढ़ नहीं आईं, लेकिन विभिन्न तरह के नोटिस भेजने लगीं।
इसी दौरान आरोप है कि फराह और उनके भाई ने जुलाई 2021 में मलखान सिंह जिला अस्पताल से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इसकी जानकारी होने पर सीएमएस स्तर से हुई जांच में उक्त प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया गया और लिखित रिपोर्ट भी दी गई। बाद में परिवार ने 24 नवंबर 2022 को नगर निगम से नया मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, जिसमें दस्तावेज, गवाह, और पार्षद की रिपोर्ट शामिल थी।
कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस से वसीम अहमद के मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी जांच उनके पास पहुंची। इसमें पता चला कि 13 मार्च 2023 को फराह बानो और उनके भाई मुस्तजाब मलिक ने नगर निगम में फर्जी तरीके से आवेदन देकर परिवार द्वारा बनवाए गए प्रमाण पत्र को निरस्त करा दिया और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नया मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करा लिया। पूरी पुरानी पत्रावली का इस्तेमाल फर्जीवाड़े में हुआ, जिसमें नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। बिना जांच किए नया प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जो गलत नीयत का संकेत देता है। सीएम स्तर से शिकायत के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार प्रारंभिक जांच में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाना साबित हुआ है, जिसमें नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध है। अब आगे की कार्रवाई विवेचना के आधार पर होगी।
नगर निगम ने गंभीर जांच शुरू की
इस पूरे प्रकरण को देखते हुए नगर निगम ने भी सख्त रुख अपनाया है। नगर आयुक्त ने उप नगर आयुक्त को जांच सौंपी है, जो यह पता लगा रहे हैं कि यह फर्जीवाड़ा किस तरह हुआ।
एएमयू कोर्ट के सदस्य भी थे वसीम अहमद
एटा के पटियाली निवासी वसीम अहमद का परिवार अलीगढ़ में बस गया था। यहीं शिक्षा के दौरान वह राजनीति में सक्रिय हुए। जनता दल में वीपी सिंह के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। राज्यसभा सदस्य रहते हुए वे एएमयू कोर्ट और ईसी के सदस्य भी रहे तथा एएमयू मामलों में काफी सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

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