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आर्थिक समीक्षा में आरटीआई की समीक्षा के सुझाव पर कांग्रेस का हमला, खरगे ने पूछा—मनरेगा के बाद अब आरटीआई की बारी?

Bolta Sach News
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RTI in Economic Survey

बोलता सच,नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आर्थिक समीक्षा में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की फिर से समीक्षा किए जाने के सुझाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार मनरेगा के बाद अब आरटीआई कानून को भी कमजोर या खत्म करने की तैयारी में है।

खरगे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आर्थिक समीक्षा में आरटीआई अधिनियम पर पुनर्विचार की बात कही गई है, जो सूचना तक नागरिकों की पहुंच सीमित करने की दिशा में संकेत देती है। उनके अनुसार, इसमें सूचना को रोकने के लिए संभावित “मंत्री स्तरीय वीटो” का सुझाव भी शामिल है और यह भी विचार किया गया है कि क्या नौकरशाहों के तबादलों, सेवा रिकॉर्ड और स्टाफ से जुड़ी रिपोर्टों को सार्वजनिक निगरानी से बाहर रखा जा सकता है।

आर्थिक समीक्षा में क्या कहा गया है?

संसद में गुरुवार को पेश वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में लगभग 20 साल पुराने आरटीआई अधिनियम, 2005 की समीक्षा करने की वकालत की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि गोपनीय रिपोर्टों और मसौदों को सार्वजनिक किए जाने से छूट दी जानी चाहिए। समीक्षा में यह भी कहा गया कि आरटीआई का उद्देश्य “अनावश्यक जिज्ञासा” को बढ़ावा देना या बाहर से बैठकर सरकार के हर छोटे निर्णय में दखल देना नहीं था।

सरकार पर आरटीआई कमजोर करने का आरोप

खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सुनियोजित तरीके से आरटीआई व्यवस्था को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक 26 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। साथ ही 2019 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि सरकार ने सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन पर नियंत्रण अपने हाथ में लेकर स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं की स्वायत्तता कम कर दी।

डिजिटल कानून और आयोग को लेकर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए “जनहित” के प्रावधान को कमजोर किया गया है और निजता की आड़ में भ्रष्टाचार को छिपाने का रास्ता खोला गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 तक केंद्रीय सूचना आयोग बिना मुख्य सूचना आयुक्त के काम करता रहा और पिछले 11 वर्षों में सातवीं बार यह अहम पद खाली छोड़ा गया।

खरगे ने यह भी कहा कि 2014 के बाद 100 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे असहमति और सच बोलने वालों के खिलाफ डर का माहौल बना है। अंत में उन्होंने तीखा सवाल किया—“मनरेगा को खत्म करने के बाद, क्या अब आरटीआई की बारी है?”


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