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शंकराचार्य विवाद पर अयोध्या के संतों में मतभेद, योगी सरकार के समर्थन में बहुमत

Bolta Sach News
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Shankaracharya controversy on Ayodhya

बोलता सच,अयोध्या : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने अब रामनगरी अयोध्या तक असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस मुद्दे पर अयोध्या के संत समाज में साफ तौर पर दो खेमे नजर आ रहे हैं। अधिकांश संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रयागराज प्रशासन के रुख के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ संत शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं।

योगी सरकार के समर्थन में खड़े संतों का कहना है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला के दौरान मर्यादा के विपरीत आचरण किया, जिसके चलते प्रशासन की कार्रवाई उचित थी। उनके अनुसार, मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नियमों और अनुशासन का पालन सभी के लिए जरूरी है, चाहे पद या प्रतिष्ठा कुछ भी हो।

वहीं, शंकराचार्य के समर्थक संतों का मानना है कि माघ मेला के दौरान शंकराचार्य के साथ प्रशासन और पुलिस द्वारा किया गया व्यवहार सही नहीं था। उनका कहना है कि एक धर्मगुरु के सम्मान और परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए था और पूरे मामले को अधिक संवेदनशील तरीके से संभाला जाना चाहिए था।

पदवी तक पहुंचा विवाद

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला के दौरान स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव हुआ था। इस घटना के बाद विवाद लगातार तूल पकड़ता गया और अब यह साधु-संतों के बीच बहस का विषय बन गया है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि विवाद में शंकराचार्य की पदवी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

कुल मिलाकर, शंकराचार्य से जुड़े इस विवाद पर अयोध्या के संतों की प्रतिक्रिया एकरूप नहीं है। कोई प्रशासनिक कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, तो कोई इसे धार्मिक मर्यादा और सम्मान से जोड़कर देख रहा है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।

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