अधिकारियों के अनुसार 92 वर्षीय अमर्त्य सेन इस समय विदेश में हैं, इसलिए नोटिस शांति निकेतन के बोलपुर स्थित उनके पैतृक घर पर परिवार के एक सदस्य को सौंपा गया। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर सेन को केवल एक ही नोटिस जारी किया गया है। उनके द्वारा जमा किए गए गणना फॉर्म में कुछ तार्किक विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके चलते उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है।
अधिकारी ने बताया कि चूंकि अमर्त्य सेन की उम्र 85 वर्ष से अधिक है, इसलिए चुनाव आयोग के नियमों के तहत संबंधित बीएलओ उनके घर जाकर ही सुनवाई करेगा। नोटिस एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आई तथ्यात्मक विसंगति के आधार पर जारी किया गया है। गणना फॉर्म में दर्ज जानकारी के अनुसार सेन और उनकी मां की उम्र के अंतर में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्शाया गया था, जिसे जांच योग्य माना गया।
अमर्त्य सेन के एक चचेरे भाई ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस बारे में सेन को जानकारी दे दी जाएगी।
इससे पहले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने अमर्त्य सेन जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को नोटिस भेजे जाने को ‘बंगाल के लोगों का अपमान’ बताया था। हालांकि भाजपा और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बावजूद टीएमसी ने हमले तेज करते हुए इसे भाजपा और चुनाव आयोग के ‘बांग्ला-विरोधी एजेंडा, विभाजन और अपमान की राजनीति’ का हिस्सा करार दिया है।