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देवरिया में शुरू हुआ “ड्राइविंग माय ड्रीम्स” कार्यक्रम

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बोलता सच देवरिया : महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में समान अवसर दिलाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। शुक्रवार शाम चार बजे देवरिया में परिवहन विभाग की ओर से “ड्राइविंग माय ड्रीम्स” कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने की।

महिलाओं के लिए नई राह

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को ड्राइविंग कौशल सिखाकर उन्हें सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष रूप से महिला प्रशिक्षकों की एक टीम बनाई गई है, जो प्रशिक्षण देने का काम करेगी। ये प्रशिक्षक वयस्क महिलाओं और बालिकाओं को एक माह का ड्राइविंग प्रशिक्षण कोर्स कराएंगी। ज़रूरत पड़ने पर प्रशिक्षण की अवधि को और भी बढ़ाया जा सकेगा।

प्रशासन का लक्ष्य है कि हर जनपद में कम से कम 100 महिलाओं और किशोरियों को प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें विधिवत ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों की महिलाओं को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे भी आत्मनिर्भरता की इस पहल से जुड़ सकें।

चयन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान

अधिकारियों के मुताबिक, लाभार्थियों का चयन एक सुनियोजित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, ताकि वास्तविक रूप से ज़रूरतमंद महिलाएँ ही इस योजना से लाभान्वित हों। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को न सिर्फ लाइसेंस मिलेगा, बल्कि उन्हें आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

मंत्री ने दिए आत्मनिर्भरता के संदेश

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “ड्राइविंग माय ड्रीम्स जैसी योजनाएँ महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं। आज समय की मांग है कि महिलाएँ हर क्षेत्र में सशक्त भागीदारी दर्ज कराएं। अब वह दौर आ गया है जब महिलाओं को केवल घर तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज की प्रगति और विकास में उनकी समान भागीदारी आवश्यक है।”

मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। चाहे स्वरोजगार योजनाएँ हों, स्वयं सहायता समूहों की पहल हो या अब यह ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम—इन सबका लक्ष्य महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है।

बदलते समाज की ओर कदम

“ड्राइविंग माय ड्रीम्स” कार्यक्रम सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास से भी जोड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की योजनाएँ समाज में लैंगिक समानता को और मजबूत बनाएंगी। देवरिया में हुई इस पहल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सैकड़ों महिलाएँ लाभान्वित होंगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह योजना महिलाओं की ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाएगी और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला देगी।


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