बोलता सच : वृंदावन के प्रसिद्ध कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय जल्द ही विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं। उनका विवाह समारोह 5 दिसंबर को जयपुर के ताज आमेर होटल में आयोजित होगा। मथुरा से उनकी भव्य बारात जयपुर पहुंच चुकी है। इसी बीच लोगों में यह चर्चा तेज है कि पौष मास (खरमास) में विवाह कैसे हो रहा है, जबकि परंपरागत रूप से इस माह में शादी जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
पौष मास और खरमास की मान्यता
हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष मास धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दौरान सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस गोचर से मलमास/खरमास शुरू होता है। मान्यता है कि इस समय शादी, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य करने से फल की प्राप्ति कम होती है, इसलिए यह अवधि मुख्यतः जप, तप और दान के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।
शास्त्रों के मुताबिक, इस समय देवताओं की ऊर्जा स्थिर रहती है, इसलिए मांगलिक कार्यों को करने से मना किया जाता है।
शादी के दिन को लेकर स्पष्टीकरण
पूर्णिमा के आधार पर 5 दिसंबर से पौष मास प्रारंभ माना जा रहा है, जबकि सूर्य संक्रांति के अनुसार यह 15 दिसंबर को शुरू होगा।
विवाह जैसे शुभ कार्य पंचांग गणना के आधार पर किए जाते हैं, और सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से पहले विवाह योग्य मुहूर्त मान्य होते हैं।
इसी कारण, 15 दिसंबर से पहले विवाह किया जा सकता है। इसीलिए कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय का विवाह 5 दिसंबर को संपन्न हो रहा है।
दिसंबर के विवाह मुहूर्त
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12 दिसंबर को शुक्र अस्त हो जाएंगे
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9 दिसंबर से कई अन्य दोष भी लग जाएंगे
इस वजह से दिसंबर में 5 और 6 दिसंबर ही अंतिम शुभ विवाह मुहूर्त हैं। इसके बाद विवाह के योग फरवरी 2026 में दोबारा बनेंगे।
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