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पूर्वांचल में पराली जलाने के मामलों में तीन गुना उछाल, चंदौली में पाँच साल बाद पहली बार दर्ज हुई घटनाएं

Bolta Sach News
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Stubble burning cases in Purvanchal

बोलता सच,उत्तर प्रदेश : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब पूर्वांचल पराली की आग से धधक रहा है। सेटेलाइट निगरानी में बीते दस दिनों में पूर्वी यूपी में तीन गुना अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। जहाँ दो महीने में 10 जिलों से सिर्फ 111 घटनाएँ दर्ज हुई थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 327 हो गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंदौली, जहाँ पिछले पाँच वर्षों में एक भी पराली जलाने की घटना दर्ज नहीं हुई थी, वहां 23 मामले रिपोर्ट किए गए। पूरे प्रदेश में सबसे कम घटना वाराणसी में मिली, जहाँ केवल चार मामले सामने आए।

कहाँ कितनी पराली जली?

पूर्वांचल में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले बलिया (90) और जौनपुर (70) में दर्ज हुए।
अन्य जिलों में स्थिति इस प्रकार रही—

जिला मामले
चंदौली 23
वाराणसी 4
भदोही 5
सोनभद्र 7
मिर्जापुर 25
गाज़ीपुर 44
आज़मगढ़ 59
मऊ 37
बलिया 90
जौनपुर 70

पूरा यूपी: 5 साल में सबसे ज्यादा मामले

केंद्र सरकार द्वारा 15 सितंबर से 30 नवंबर तक की गई सेटेलाइट मॉनिटरिंग में पूरे प्रदेश में 7290 पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज की गईं—जो पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक हैं।

20 नवंबर तक पश्चिमी और कुछ पूर्वी जिलों में 100–800 मामलों की पुष्टि हुई थी, जबकि पूर्वांचल के 10 जिलों में सिर्फ 111 मामले पाए गए थे। लेकिन 20 नवंबर के बाद तेजी से वृद्धि देखी गई।

देरी से कटाई और बोआई बनी वजह

धान की कटाई के दौरान मोंथा तूफान और बारिश ने ग्रामीण इलाकों में कृषि प्रक्रियाओं को प्रभावित किया।
उप निदेशक कृषि अमित जायसवाल के अनुसार—

  • बारिश ने धान की कटाई में देरी की

  • रबी की बोआई के लिए समय कम बचा

  • कुछ किसानों ने खेत जल्दी साफ करने के लिए पराली को आग लगा दी

इन किसानों पर 5,000 से 30,000 रुपये तक जुर्माना लगाया गया है।

सबसे कम मामले कौन से मंडलों में?

  • मिर्जापुर मंडल – पूरे यूपी में सबसे कम, सिर्फ 37 मामले

  • वाराणसी मंडल140 मामले

  • गोरखपुर मंडल – पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा घटनाएँ

क्या बोले कृषि अधिकारी?

वाराणसी मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक शैलेंद्र कुमार ने बताया—

“किसानों में जागरूकता बढ़ी है, इसलिए पिछले वर्ष की तुलना में घटनाएँ कम हैं।
लेकिन बारिश की वजह से कटाई और बोआई में देरी हुई, जिससे अंतिम समय में पराली जलाने के मामले बढ़े।
सभी दोषी किसानों पर अर्थदंड लगाया गया है।”


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