बोलता सच,नई दिल्ली : अंतरिक्ष जगत से जुड़ा एक भावुक पल उस वक्त सामने आया, जब अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की 90 वर्षीय मां संज्योति चावला और बहन दीपा से मुलाकात की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें अपनापन, आत्मीयता और बीती यादों की गहरी छाया साफ नजर आई। तीनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और बातचीत के दौरान कल्पना से जुड़ी कई स्मृतियां ताजा हो गईं।
भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का फरवरी 2003 में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया हादसे में निधन हो गया था। उनकी असमय मृत्यु ने न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया को गहरे शोक में डुबो दिया था। सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला का रिश्ता सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और प्रेरणा से भरा हुआ था।
भारत दौरे पर आईं सुनीता विलियम्स 22 जनवरी से शुरू हो रहे केरल साहित्य महोत्सव के नौवें संस्करण में हिस्सा लेने पहुंची हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत आना उन्हें घर लौटने जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता का जन्म भी यहीं हुआ था। उन्होंने भारतीय संस्कृति और लोगों से अपने भावनात्मक जुड़ाव की भी बात कही।
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कल्पना चावला की मां संज्योति चावला ने बताया कि कोलंबिया हादसे के बाद सुनीता विलियम्स करीब तीन महीने तक लगातार उनके घर आती थीं। वह सुबह से शाम तक परिवार के साथ समय बितातीं और गहरे दुख से गुजर रहे परिवार को ढांढस बंधाती थीं। उन्होंने कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे को अपने करियर और सपनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं।
अपनी बेटी को याद करते हुए संज्योति चावला ने कहा कि कल्पना अपने साथ जीवन का अमूल्य संदेश छोड़ गई। उन्होंने बताया कि कल्पना हमेशा कहा करती थी, “मानवता ही मेरा धर्म है।” जब उससे उसका धर्म पूछा जाता था, तो वह जवाब देती थी, “मेरा धर्म कर्म है।” एक मां के लिए यह गर्व और पीड़ा, दोनों का संगम था।
यह मुलाकात सिर्फ दो परिवारों की नहीं, बल्कि उन सपनों और मूल्यों की थी, जिन्हें कल्पना चावला ने अपनी पूरी जिंदगी जिया और दुनिया को सौंप दिया।
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