चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एसिड अटैक से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से तय दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया कि अब तक 15 हाई कोर्ट ने अपने-अपने यहां लंबित एसिड अटैक मामलों का ब्योरा सौंपा है।
दोषियों की संपत्ति जब्ती पर सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “एसिड अटैक के दोषियों की संपत्ति क्यों न जब्त की जाए? अगर कोई व्यक्ति इस अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसकी अचल संपत्ति को जब्त कर पीड़ित को मुआवजा देने में क्यों न इस्तेमाल किया जाए?”
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सजा और कार्रवाई इतनी कठोर नहीं होगी कि अपराधी उसे दर्दनाक माने, तब तक रोकथाम के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
चार सप्ताह में मांगा गया विस्तृत डेटा
शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें साल-दर-साल एसिड अटैक की घटनाएं, चार्जशीट दाखिल होने की स्थिति, निपटाए गए मामलों की संख्या, ट्रायल स्तर पर लंबित केस और ट्रायल के बाद दायर अपीलों का विवरण शामिल होगा।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा पेंडिंग केस
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 198 एसिड अटैक मामले लंबित हैं। इसके बाद गुजरात में 114, बिहार में 68, पश्चिम बंगाल में 60 और महाराष्ट्र में 58 मामले पेंडिंग हैं। कोर्ट ने कहा कि कई हाई कोर्ट से अभी रिपोर्ट आना बाकी है।
पीड़ितों की पूरी जानकारी देने के निर्देश
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक एसिड अटैक पीड़ित की संक्षिप्त प्रोफाइल प्रस्तुत करनी होगी। इसमें पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता, वर्तमान रोजगार स्थिति, वैवाहिक स्थिति, मेडिकल ट्रीटमेंट का विवरण और सरकार द्वारा इलाज व पुनर्वास पर किए गए या किए जाने वाले खर्च की जानकारी शामिल होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से अपील की कि वे एसिड अटैक से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से निपटाने पर विचार करें, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
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