बोलता सच,नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसे एक गैर सरकारी एनजीओ ने दायर किया था। इसमें पड़ोसी देशों से आए हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन जैसे सताए गए अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की गई है। ये लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन भी कर चुके हैं।
इन पड़ोसी मुल्कों से आए अल्पसंख्यक लोगों के नाम एसआईआर में शामिल किए जाने को लेकर एनजीओ ‘आत्मदीप’ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने सोमवार को दलीलें पेश कीं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को तय कर दी। इसी दिन पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।
सुरक्षा और नागरिकता पाने का अधिकार
याचिकाकर्ता एनजीओ ने बताया कि ऐसे करीब 50,000 लोग हैं जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके थे। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के तहत इन्हें सुरक्षा और नागरिकता पाने का हक है।
NGO ने CAA की धारा 6B का दिया हवाला
एनजीओ ने CAA की धारा 6B का हवाला देते हुए कहा कि इनमें से कई लोगों ने नागरिकता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक उन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। एनजीओ के अनुसार, ‘नागरिकता प्रमाण जारी करने में देरी और वर्तमान एसआईआर के दौरान इन रसीदों की मान्यता न मिलने से एक गंभीर संवैधानिक संकट पैदा हो गया है।’
एनजीओ ने आगे कहा कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में प्रताड़ित किए गए इन लोगों को संसद पहले ही अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता दे चुकी है। अब ये सुरक्षा और एकीकरण के हकदार हैं। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अब ये लोग सामाजिक बहिष्कार और मताधिकार से वंचित होने के खतरे का सामना कर रहे हैं।
रसीदों को अस्थायी प्रमाण मानने की मांग
एनजीओ ने यह भी कहा कि नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 के अनुसार ऑनलाइन आवेदन जमा करने पर मिलने वाली रसीद ही आवेदन का वैध और आधिकारिक प्रमाण है। एनजीओ ने कहा कि जब तक आवेदन का अंतिम निपटारा तय समय में नहीं हो जाता, तब तक इन रसीदों को नागरिकता निर्धारण लंबित होने का वैध अस्थायी प्रमाण माना जाना चाहिए।
इसको भी पढ़ें : किंग कोहली का शतक… पर गंभीर को दिया ‘गंभीर’ इग्नोर!
➤ You May Also Like






















































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































