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दुबई एयर शो में तेजस दुर्घटना में विंग कमांडर नमांश स्याल का निधन, देश ने खोया एक उत्कृष्ट फाइटर पायलट

Bolta Sach News
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Tejas crash at Dubai Air Show

बोलता सच/नई दिल्ली। दुबई एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के तेजस लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। इस हादसे में भारतीय वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की दर्दनाक मौत हो गई। मात्र 37 वर्ष की उम्र में देश ने एक कुशल, अनुशासित और अत्यंत प्रतिभाशाली लड़ाकू पायलट को खो दिया है, जिनकी पूरी सेवा भारत के लिए समर्पित रही।

विंग कमांडर नमांश की वीरता और उत्कृष्टता की झलक उनके पूरे सैन्य करियर में दिखाई देती है। सैनिक स्कूल सुजानपुर तिरा से अपनी यात्रा शुरू करने वाले नमांश ने पढ़ाई के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता में भी हमेशा अग्रणी स्थान हासिल किया। वे स्कूल में चेनाब हाउस के कैप्टन रहे और 2005 बैच के दौरान अपने शिक्षकों और साथियों पर गहरी छाप छोड़ गए। स्कूल प्रशासन ने शनिवार को उनके सम्मान में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जिसमें उनके साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसालें याद की गईं।

नमांश के पिता, रिटायर्ड सूबेदार मेजर जगन्नाथ स्याल, जो आर्मी मेडिकल कोर से सेवानिवृत्त हैं, ने बताया कि यह संयोग बेहद दुखद था कि जब वे अपने बेटे के हवाई करतबों का वीडियो देख रहे थे, उसी समय स्क्वाड्रन के अधिकारी घर पहुंचे और दुर्घटना की खबर दी। उन्होंने कहा—“वह क्षण हमेशा याद रहेगा। हम देश की सेवा करते आए हैं, लेकिन यह दर्द असहनीय है।”

दुर्घटना की सूचना मिलने के समय नमांश की पत्नी विंग कमांडर अफसान कोलकाता में एक ट्रेनिंग कोर्स पर थीं। वहीं उनकी 6 वर्षीय बेटी तमिलनाडु के सुलुर में अपने दादा-दादी के साथ थी, जहां नमांश तेजस उड़ाने वाली नंबर 3 स्क्वाड्रन में तैनात थे।


एनडीए में मिली झलक असाधारण क्षमता की

12वीं पास करने के बाद नमांश ने पहले एनआईटी हमीरपुर में दाखिला लिया था, लेकिन उनका दिल फौज में जाने का था। उन्होंने एसएसबी परीक्षा पास की और वर्ष 2006 में एनडीए के 115वें कोर्स में शामिल हुए। उनकी प्रतिभा का अंदाज़ा इसी से लगता है कि उन्हें एकेडमी कैडेट कैप्टन (ACC) बनाया गया—यह पद केवल उन कैडेट्स को मिलता है जो अनुशासन, नेतृत्व और समग्र योग्यता में असाधारण प्रदर्शन करते हैं।

नवंबर 2008 में आयोजित एनडीए की पासिंग-आउट परेड में वे परेड कमांडर रहे। साथ ही उन्होंने समग्र योग्यता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेसिडेंट्स सिल्वर मेडल भी हासिल किया—जो किसी भी कैडेट के लिए सर्वोच्च सम्मान होता है।


फाइटर पायलट के रूप में तेजस से मिशन की ऊंचाइयों तक

दिसंबर 2009 में भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिलने के बाद उन्होंने मिग-21, एसयू-30 एमकेआई और फिर स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस उड़ाया। तेजस पर उड़ान भरने के लिए पायलटों का चयन बेहद कठोर मापदंडों के आधार पर होता है, जो नमांश की दक्षता का प्रमाण है।

तेजस उड़ाने से पहले वे हकीमपेट एयरफोर्स स्टेशन में किरण ट्रेनर विमान के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्यरत थे। कई युवा पायलटों ने उनसे उड़ान की बारीकियाँ सीखीं। उन्हें एक ऐसा प्रशिक्षक माना जाता था जो सख्त अनुशासन और शांत स्वभाव दोनों का अनोखा संतुलन रखता था।


पैतृक गांव में किया जाएगा अंतिम संस्कार

विंग कमांडर नमांश स्याल का अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव पटियालकर, जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में किया जाएगा। पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोग उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व और हमेशा मुस्कुराते रहने वाले जांबाज सैनिक के रूप में याद कर रहे हैं।


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