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सांप ने डसा, फिर भी नहीं घबराया युवक — पॉलिथीन में भरकर खुद ही पहुंचा अस्पताल, 7 घंटे चले इलाज के बाद बची जान

Bolta Sach News
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The snake bit me, yet
बोलता सच प्रतापगढ़। साहस और सूझबूझ से भरी यह घटना जिले के पट्टी कोतवाली क्षेत्र के रानीपुर गांव की है, जहां शनिवार रात एक युवक को बिजली का काम करते समय सांप ने डस लिया। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग घबरा जाते हैं, लेकिन इस युवक ने असाधारण हिम्मत दिखाई। उसने न सिर्फ सांप को मारा नहीं, बल्कि उसे पकड़कर पॉलिथीन में बंद किया और खुद बाइक से अस्पताल पहुंच गया। समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।
जानकारी के मुताबिक, 25 वर्षीय शमशाद शनिवार की रात करीब आठ बजे अपने घर में बिजली के तार ठीक कर रहा था। तभी अचानक उसे पैर में तेज चुभन महसूस हुई। जब नीचे देखा तो सांप उसके पैर से लिपटा हुआ था। वह संभल पाता, इससे पहले ही सांप ने उसे डस लिया। घटना के बाद भी शमशाद ने हिम्मत नहीं हारी। उसने आवाज लगाकर परिजनों को बुलाया और साहस दिखाते हुए सांप को दबोच लिया। फिर उसे एक पॉलिथीन बैग में बंद किया और अपनी मोटरसाइकिल से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित सीएचसी पट्टी अस्पताल पहुंच गया।
अस्पताल पहुंचने पर वहां मौजूद लोग सांप पकड़े युवक को देखकर हैरान रह गए। शमशाद ने डॉक्टरों को बताया कि “यही सांप मुझे डसकर आया है।” तत्काल ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. नीरज सिंह सोमवंशी ने उसकी जांच शुरू की। डॉ. नीरज ने बताया कि मरीज को तुरंत एंटी वेनम इंजेक्शन लगाया गया और सात घंटे तक लगातार निगरानी में रखा गया। “समय पर इलाज मिलने से उसकी हालत में सुधार हुआ और उसकी जान बचाई जा सकी,” डॉक्टर ने बताया। उन्होंने कहा कि अगर थोड़ी भी देर होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
इलाज के बाद जब स्थिति स्थिर हुई तो चिकित्सकों ने शमशाद को घर भेज दिया। वहीं, अस्पताल स्टाफ ने पॉलिथीन में बंद सांप को जंगल में छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि वह कोबरा प्रजाति का सांप था। डॉ. नीरज सिंह ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने के बाद किसी भी स्थिति में घबराएं नहीं। “ऐसे मामलों में झाड़-फूंक या देसी इलाज के चक्कर में समय बर्बाद करना बेहद खतरनाक होता है,” उन्होंने कहा। “सांप काटने के बाद मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।”
स्थानीय लोगों ने कहा कि शमशाद की हिम्मत और सूझबूझ काबिले तारीफ है। जहां लोग सांप देखकर डर जाते हैं, वहीं उसने उसे पकड़कर डॉक्टरों को दिखाया, जिससे सही इलाज संभव हो सका।

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